लोरमी, छत्तीसगढ़। मुंगेली जिले के ग्राम खेकतरा में सर्व आदिवासी समाज द्वारा भव्य आदिवासी सम्मेलन एवं अमर शहीद वीर नारायण सिंह के 168वें स्मृति दिवस का आयोजन किया गया। इस अवसर पर आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं झाबुआ विधायक विक्रांत भूरिया मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरुआत बुढ़ादेव देवालय एवं शहीद वीर नारायण सिंह के छायाचित्र पर विधिवत पूजा-अर्चना के साथ की गई।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए विक्रांत भूरिया ने आदिवासी अस्मिता पर जोर देते हुए कहा कि आदिवासी समाज की पहचान को किसी भी नाम से बदला नहीं जा सकता। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि हम वनवासी नहीं बल्कि आदिवासी हैं और जल, जंगल व जमीन पर हमारा ऐतिहासिक अधिकार रहा है। उन्होंने चिंता जताई कि छत्तीसगढ़ में आदिवासी आबादी में लगातार गिरावट देखी जा रही है। “एक तीर, एक कमान—सभी आदिवासी एक समान” का आह्वान करते हुए उन्होंने समाज से एकजुट रहने की अपील की और कहा कि आदिवासी देश के मूल निवासी हैं तथा वे हर संघर्ष में समाज के साथ खड़े रहेंगे।उन्होंने वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों पर भी अपनी बात रखते हुए आरोप लगाया कि सत्ता में परिवर्तन के बाद आदिवासी अधिकारों का हनन बढ़ा है और जल-जंगल-जमीन से जुड़े विषयों पर आदिवासी हितों की अनदेखी की जा रही है। इससे पहले समाज द्वारा मुख्य अतिथि का पारंपरिक रीति-रिवाजों से आत्मीय स्वागत किया गया।
कार्यक्रम में आदिवासी समाज के प्रदेश उपाध्यक्ष रामजी ध्रुव ने भी समाज को संबोधित करते हुए संगठनात्मक मजबूती पर बल दिया और कहा कि आदिवासी समाज की एकता ही उसके अधिकारों की सबसे बड़ी ताकत है। सम्मेलन में बिंद्रा नवागढ़ विधायक एवं आदिवासी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जनक राम ध्रुव, भिलाई नगर विधायक देवेन्द्र यादव, पूर्व मंत्री प्रेमसाय टेकाम, अनुसूचित जनजाति आयोग के पूर्व अध्यक्ष भानु प्रताप सिंह, कांग्रेस के विभिन्न जिलों के पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोग शामिल हुए। कार्यक्रम में हजारों की संख्या में उपस्थित लोगों ने शहीद वीर नारायण सिंह के आदर्शों को आत्मसात करने का संकल्प लिया।

