Monday, April 20, 2026
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जल, जंगल और जमीन की पुकार: चिरमिरी में शुरू हुई फिल्म “रूख – हमर भुइयां हमर महतारी” की भव्य शूटिंग

सरगुजा, छत्तीसगढ़/ चिरमिरी की हरी-भरी वादियों में इन दिनों एक नई सृजनात्मक हलचल देखने को मिल रही है। प्रकृति, संस्कृति और सामाजिक सरोकारों को केंद्र में रखकर बन रही बहुचर्चित छत्तीसगढ़ी फिल्म “रूख – हमर भुइयां हमर महतारी” की शूटिंग पूरे उत्साह और भव्यता के साथ जारी है। डी.एस. मूवी के बैनर तले बन रही इस फिल्म का पहला शेड्यूल 24 मार्च 2026 से शुरू हो चुका है और लगातार प्रगति पर है। यह फिल्म न केवल मनोरंजन का माध्यम बनने जा रही है, बल्कि यह जल, जंगल और जमीन जैसे मूलभूत मुद्दों को लेकर एक सशक्त संदेश भी समाज तक पहुंचाने का प्रयास करेगी।
इस फिल्म का निर्देशन और कोरियोग्राफी चिरमिरी के ही प्रतिभाशाली कलाकार बाबा बघेल द्वारा किया जा रहा है, जिन्होंने कोरियोग्राफी के क्षेत्र में पहले ही अपनी मजबूत पहचान बना ली है। वहीं फिल्म की कहानी और संवाद चिरमिरी के ही उभरते लेखक रोहित देवांगन ने लिखे हैं, जो इस क्षेत्र की संस्कृति और सामाजिक मुद्दों को बेहद करीब से समझते हैं। फिल्म के छायांकन की जिम्मेदारी अनुभवी डीओपी राज ठाकुर संभाल रहे हैं, जबकि सहनिर्देशक के रूप में मुंबई से आए आरिफ खान अपनी विशेषज्ञता का योगदान दे रहे हैं। पूरी टीम में अनुपमा मनहर, शिवा चतुर्वेदी जैसे सहायक निर्देशक और विनोद शर्मा जैसे प्रोडक्शन प्रभारी शामिल हैं, जो इस फिल्म को उच्च स्तर तक ले जाने में जुटे हैं।
प्रकृति संरक्षण का बिगुल बजाती फिल्म “रूख”
“रूख” केवल एक फिल्म नहीं, बल्कि एक विचार है – एक आंदोलन है, जो प्रकृति और पर्यावरण के संरक्षण के लिए समाज को जागरूक करने का प्रयास करता है। आज जब पूरी दुनिया ग्लोबल वार्मिंग और पर्यावरणीय संकट से जूझ रही है, ऐसे समय में इस प्रकार की फिल्मों का निर्माण अत्यंत आवश्यक हो जाता है। यह फिल्म दर्शकों को यह समझाने का प्रयास करेगी कि जल, जंगल और जमीन केवल संसाधन नहीं, बल्कि हमारे अस्तित्व का आधार हैं।
निर्देशक बाबा बघेल बताते हैं कि इस फिल्म के निर्माण के पीछे उनका मुख्य उद्देश्य लोगों में प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि सरगुजा संभाग में वनों की कटाई, जल संकट और पर्यावरणीय असंतुलन जैसी समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं, और यह फिल्म इन मुद्दों को प्रभावी तरीके से सामने लाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि चिरमिरी, जिसे “मिनी शिमला” के नाम से जाना जाता है, उसकी प्राकृतिक सुंदरता को विश्व पटल पर पहचान दिलाना भी इस फिल्म का एक प्रमुख लक्ष्य है।
स्थानीय प्रतिभाओं को मिला स्वर्णिम मंच
इस फिल्म की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें स्थानीय कलाकारों को प्राथमिकता दी गई है। चिरमिरी और आसपास के क्षेत्रों के कलाकारों को इस फिल्म के माध्यम से अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिला है। इससे न केवल क्षेत्रीय कला और संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि स्थानीय युवाओं को फिल्म इंडस्ट्री में आगे बढ़ने का एक मजबूत मंच भी प्राप्त होगा। बाबा बघेल ने बताया कि यह फिल्म पिछले चार वर्षों से तैयारी के चरण में थी और अब जाकर इसे मूर्त रूप दिया जा सका है। उन्होंने स्थानीय जनता और कलाकारों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके सहयोग के बिना यह संभव नहीं हो पाता। इस फिल्म के जरिए सरगुजा अंचल की लोक परंपराएं, सांस्कृतिक धरोहर और जनजीवन को बड़े पर्दे पर प्रस्तुत किया जाएगा।
विलेन की छवि से निकलकर करप्ट खाकी वर्दी में छाए बुद्धम श्याम
फिल्म “रूख – हमर भुइयां हमर महतारी” का सबसे बड़ा आकर्षण चिरमिरी के माटीपुत्र बुद्धम श्याम हैं, जो इस बार एक बिल्कुल अलग और चौंकाने वाले अंदाज़ में नजर आने वाले हैं। अब तक परदे पर खतरनाक विलेन के रूप में अपनी मजबूत पहचान बना चुके बुद्धम श्याम इस फिल्म में पुलिस इंस्पेक्टर की भूमिका निभा रहे हैं, यह किरदार एक खास अहमियत रखता है जो कहानी में एक अलग ही रोमांच भर देता है। उनका यह किरदार फिल्म को और भी ज्यादा रोचक और प्रभावशाली बनाता है, जिसमें बुद्धम श्याम अपनी अभिनय क्षमता का एक नया और गहरा रूप दर्शकों के सामने पेश करने जा रहे हैं।
बुद्धम श्याम का जीवन भी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। एक साधारण परिवार से निकलकर उन्होंने अपनी मेहनत, लगन और जुनून को बरकरार रखा है। गोंडी गायन और रंगमंच से अपने करियर की शुरुआत करने वाले बुद्धम श्याम ने 2019 में फिल्मों में कदम रखा और बहुत ही कम समय में अपने दमदार अभिनय से दर्शकों का दिल जीत लिया। वर्ष 2025 में फिल्म “तोर मया के चिन्हा” के लिए उन्हें चिन्हारी छालीवुड फिल्म फेयर अवार्ड 2025 में बेस्ट विलेन का खिताब मिला, जो उनके शानदार अभिनय का प्रमाण है।
आने वाले समय में उनकी कई फिल्में दर्शकों के सामने होंगी, जिनमें डीके, कुकड़ा गली, प्रयोग, लमसेना और रूख – हमर भुइयां हमर महतारी शामिल हैं। हर फिल्म में उनका अलग अंदाज़ और किरदार देखने को मिलेगा, लेकिन “रूख” में निभाया गया उनका दमदार लुक वाला इंस्पेक्टर का रोल उनके करियर का सबसे अलग और चुनौतीपूर्ण किरदार माना जा रहा है।
बुद्धम श्याम खुद कहते हैं कि यह फिल्म उनके लिए सिर्फ एक प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी है। वे मानते हैं कि भले ही उनका किरदार नेगेटिव है, लेकिन उसके माध्यम से समाज को एक बड़ा संदेश दिया जा रहा है कि प्रकृति के दोहन और भ्रष्ट व्यवस्था के खिलाफ जागरूकता का। उन्होंने कहा कि इस फिल्म का हिस्सा बनना उनके लिए गर्व की बात है और वे इसे अपने करियर का एक महत्वपूर्ण पड़ाव मानते हैं।
अपने इस नए अवतार को लेकर वे बेहद उत्साहित हैं और मानते हैं कि दर्शक उन्हें इस बार एक बिल्कुल अलग रूप में देखेंगे – जहां खलनायकी और खाकी का संगम एक नई कहानी रचेगा। उनकी कोशिश है कि वे अपने अभिनय से दर्शकों के दिलों तक पहुंचें और इस फिल्म के संदेश को हर व्यक्ति तक पहुंचाने में सफल हों।
मल्टी-लैंग्वेज फिल्म के साथ साउथ की एक्शन टीम का रहेगा तड़का
फिल्म “रूख” को केवल छत्तीसगढ़ तक सीमित नहीं रखा जा रहा है, बल्कि इसे मल्टी-लैंग्वेज फिल्म के रूप में तैयार किया जा रहा है। उम्मीद है कि यह फिल्म छत्तीसगढ़ी के साथ-साथ अन्य चार भाषाओं में भी रिलीज होगी, जिससे इसका दायरा और प्रभाव काफी बढ़ जाएगा। इस फिल्म में साउथ इंडस्ट्री की एक्शन टीम को भी शामिल किया गया है, जो इसके एक्शन सीक्वेंस को और भी रोमांचक बनाएगी। इससे फिल्म में तकनीकी गुणवत्ता और मनोरंजन का स्तर दोनों ही ऊंचा होगा।
बड़े कलाकारों की मौजूदगी से बढ़ी फिल्म की भव्यता
इस फिल्म में छत्तीसगढ़ फिल्म इंडस्ट्री के कई नामचीन कलाकार शामिल हैं, जिनमें शिवा साहू, लीना कोसमा, हर्ष चंद्र, तनु प्रधान, जीत शर्मा, दिनेश सिन्हा, बरातू रावेन, हार्दिक शर्मा, हिमांशु, दिनेश केहरी, अशोक जाधव, मन्केश, जी.एन. देवांगन, दिनेश पाण्डे और कृष्णकांत जैसे कलाकार प्रमुख हैं। फिल्म के निर्माता दिनेश बघेल हैं, जो इस प्रोजेक्ट को बड़े स्तर पर सफल बनाने के लिए लगातार प्रयासरत हैं। पूरी टीम का समर्पण और मेहनत इस फिल्म को एक यादगार कृति बनाने की दिशा में अग्रसर कर रही है।
प्रकृति, संस्कृति और समाज का संगम बनेगी फिल्म “रूख”
“रूख – हमर भुइयां हमर महतारी” केवल एक फिल्म नहीं, बल्कि एक संदेश हैएक चेतना है, जो लोगों को अपने पर्यावरण और संस्कृति के प्रति जागरूक करने का प्रयास करेगी। यह फिल्म दर्शकों को यह सोचने पर मजबूर करेगी कि अगर आज हमने प्रकृति की रक्षा नहीं की, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए क्या बचेगा। चिरमिरी की वादियों में बन रही यह फिल्म न केवल स्थानीय कलाकारों के सपनों को उड़ान दे रही है, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ को एक नई पहचान देने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है। दर्शकों को अब इस फिल्म के रिलीज होने का बेसब्री से इंतजार है, क्योंकि यह फिल्म मनोरंजन के साथ-साथ एक मजबूत सामाजिक संदेश भी लेकर आने वाली है।

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