Friday, December 12, 2025
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15वां गोंडवाना सांस्कृतिक विजय महोत्सव एवं ईशर गौरा विवाहोत्सव महासम्मेलन भव्य रूप से सम्पन्न: गूंज उठा गोंडवाना की अस्मिता का स्वर

एमसीबी! छत्तीसगढ़ के नवगठित मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) जिले के भलौर स्थित राष्ट्रीय राजमार्ग 43 के किनारे बने गोंडवाना सांस्कृतिक मैदान में 20 अक्टूबर 2025 को इतिहास रच गया। गोंडवाना समग्र विकास क्रांति आंदोलन के तत्वावधान में आयोजित 15वां गोंडवाना सांस्कृतिक विजय महोत्सव एवं ईशर गौरा विवाहोत्सव महासम्मेलन भव्य और गरिमामय रूप में सम्पन्न हुआ। इस आयोजन में गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पाली-तानाखार विधायक माननीय तुलेश्वर हीरा सिंह मरकाम मुख्य अतिथि रहे, वहीं राष्ट्रीय महासचिव माननीय श्याम सिंह मरकाम ने विशिष्ट उपस्थिति दी।

गोंडियन परंपरा का अनुपम संगम – ईशर गौरा विवाहोत्सव (मडमिंग नेंग) की पवित्र रस्म

कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण रहा ईशर गौरा विवाहोत्सव (मडमिंग नेंग), जिसे गोंडियन रुढ़िवादी परंपरा के अनुसार बखूबी निभाया गया। यह आयोजन गोंडवाना संस्कृति की मूल पहचान का प्रतीक बन गया, जहां हजारों की संख्या में गोंडवाना समुदाय के मातृशक्ति, पितृशक्ति, बच्चे और बुजुर्ग पारंपरिक वेशभूषा में सजधजकर शामिल हुए। मांदर की थाप और गौरा नृत्य की लय पर झूमते हुए श्रद्धालु विशाल कलश यात्रा में शामिल हुए, जो विवाह स्थल से गोंडवाना सांस्कृतिक मैदान तक पहुंची। इस कलश यात्रा की सफलता में जीएसयू के कलश यात्रा प्रभारियों की उल्लेखनीय भूमिका रही।

गोंडवाना की अस्मिता का पर्व – संस्कृति, परंपरा और गौरव का संगम

मुख्य अतिथि दादा तुलेश्वर हीरा सिंह मरकाम ने अपने उद्बोधन में कहा कि यह महोत्सव गोंडवाना की प्राचीन परंपराओं, मान्यताओं और अस्मिता को जीवंत रखने का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि गोंडवाना की सभ्यता 88 शंभुओं की पीढ़ी की पहचान है। हमारे समुदाय में तीन प्रमुख संस्कार जन्म, विवाह और मृत्यु आज भी अपने मूल रूप में जीवित हैं, जो हमारे सांस्कृतिक गर्व का परिचायक हैं। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि प्राचीन काल में हमारे पूर्वजों को कोलाहल विष देकर दुर्बल किया गया था, और आज हमारे ही समुदाय के लोग नशे के जाल में फंसते जा रहे हैं। यह हमारी अस्मिता के लिए खतरा है। उन्होंने आह्वान किया कि सशक्त समाज और राष्ट्र निर्माण के लिए नशा मुक्त गोंडवाना समाज का निर्माण अनिवार्य है।

गोंडवाना का गौरवशाली इतिहास – 1750 वर्ष की सभ्यता के साक्ष्य आज भी जीवित

मरकाम जी ने कहा कि गोंडवाना राज के रूप में हमारी सभ्यता का 1750 वर्ष पुराना गौरवशाली इतिहास है। गोंडवाना के राजा-महाराजाओं और रानियों ने समाजहित में जो निर्माण कार्य किए जिसमे कुएं, बावलियां, तालाब, किले, महल वे आज भी गोंडवाना के स्वर्णिम इतिहास के जीवंत प्रमाण हैं। उन्होंने कहा कि वनाधिकार मान्यता पत्रक जैसे अधिकार गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के लंबे संघर्षों का परिणाम हैं।

“एक मुठ्ठी चावल से गोंडवाना का महाकल्याण” आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में आंदोलन का आह्वान

विशिष्ट अतिथि दादा श्याम सिंह मरकाम (राष्ट्रीय महासचिव, गोंगपा) ने कहा कि ईशर गौरा विवाहोत्सव, पूनल वंजी पड्डूम और देवारी महोत्सव हमारे सांस्कृतिक जागरण की मिसाल हैं। उन्होंने कहा कि हर गोंडियन को अपने पुरातन संस्कृति और परंपराओं को जीवंत रखना चाहिए, क्योंकि यही हमारी मूल पहचान है। उन्होंने दादा हीरा सिंह मरकाम जी की संकल्पना “एक मुठ्ठी चावल से गोंडवाना का महाकल्याण” को जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान किया, जिससे आर्थिक रूप से सशक्त गोंडवाना समाज का निर्माण हो सके।

गोंडवाना समग्र विकास क्रांति आंदोलन की उल्लेखनीय भूमिका

इस भव्य आयोजन में गोंडवाना समग्र विकास क्रांति आंदोलन के सभी अनुसांगिक संगठनों की सक्रिय और समर्पित भूमिका रही। शीर्ष नेतृत्व और कार्यकर्ताओं की सूझबूझ एवं समर्पण से यह आयोजन पिछले 15 वर्षों की सफलता का प्रतीक बन गया है। यह महोत्सव न केवल सांस्कृतिक धरोहर और नेंग दस्तूर की पुनर्स्थापना का माध्यम है, बल्कि यह धार्मिक, राजनैतिक, शैक्षणिक और संवैधानिक जागरूकता के लिए भी प्रेरणादायक मिशाल है।

गौरवशाली उपस्थिति और सांस्कृतिक झंकार ने भरा ऊर्जा का संचार

इस अवसर पर मुख्य अतिथि श्री तुलेश्वर हीरा सिंह मरकाम (विधायक पाली तानाखार), श्री श्याम सिंह मरकाम (राष्ट्रीय महासचिव), श्री संजय कमरो (प्रदेश अध्यक्ष, गोंगपा छत्तीसगढ़), निलेश पांडेय (प्रदेश महामंत्री), दीपक मरावी (प्रदेश अध्यक्ष, युवामोर्चा), रायताड़ हंसवती श्याम (प्रदेश अध्यक्ष, गोंडवाना स्टूडेंट्स यूनियन) सहित हजारों सगाजनों और गणमान्य जनों की गरिमामय उपस्थिति रही।

सांस्कृतिक प्रस्तुति ने मोहा मन – मांदर की थाप पर झूम उठा गोंडवाना मैदान

कार्यक्रम में सरगुजा अंचल के सुप्रसिद्ध कलाकार दिलसाय मरपच्ची, NSR म्यूजिक के संस्थापक जिंद जानम आर्मों, बबली रानी, और जीएसयू के युवा कलाकार शिवशंकर पोया, रामवती पोर्ते, हेमा देवी आदि ने अपनी शानदार प्रस्तुति से दर्शकों का दिल जीत लिया। मंच संचालन केवल सिंह मरकाम (गोंगपा जिलाध्यक्ष, एमसीबी) ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन दीपक कुमार मरावी (पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष, युवामोर्चा छत्तीसगढ़) के द्वारा किया गया।

गोंडवाना की सांस्कृतिक चेतना का दीप फिर प्रज्वलित-अस्मिता, संस्कृति और एकता का संगम बना भलौर

भलौर का यह आयोजन न केवल गोंडवाना संस्कृति के पुनर्जागरण का प्रतीक बना, बल्कि यह गोंडवाना समाज के एकजुटता, आत्मगौरव और सांस्कृतिक पुनरुत्थान की दिशा में एक सशक्त कदम साबित हुआ। हजारों की भागीदारी और पारंपरिक उत्साह ने यह संदेश दिया कि गोंडवाना की आत्मा अब भी जीवित है, और यह चेतना आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य करती रहेगी।

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