Saturday, April 25, 2026
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शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग में विशेष अभियान 3.0 जोरों पर चल रहा है कार्यक्रम

नई दिल्ली : शिक्षा मंत्रालय ने पूरे संकल्प और ऊर्जा के साथ विशेष अभियान 3.0 शुरू किया है। स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग (डीओएसईएंडएल) तथा उसके स्वायत्त निकाय लगभग 8 लाख स्कूली छात्रों एवं 43 हजार से अधिक शिक्षकों की भागीदारी के माध्यम से देश भर के संस्थानों और स्कूलों की मदद से इस अभियान को अगले स्तर पर ले जा रहे हैं।

डीओएसईएंडएल ने 31.10.2023 तक 30,934 स्वच्छता अभियान चलाने का लक्ष्य रखा है। इस अभियान के दौरान जन शिकायतों और जन शिकायत अपीलों के निस्तारण तथा दस्तावेजों को छांटने एवं जन शिकायतों के निपटान आदि के उद्देश्य से 38,998 फाइलों की समीक्षा पर विशेष ध्यान दिया गया है।

डीओएसईएंडएल ने तीसरे सप्ताह (20 अक्टूबर, 2023 तक) में निम्नलिखित उपलब्धियां हासिल की हैं:

  • अभियान के दौरान 25,715 स्वच्छता अभियान चलाए गए ।
  • 747 लोक शिकायतों का निपटारा किया।
  • लोक शिकायत अपीलों का शत-प्रतिशत निस्तारण किया गया ।
  • 3,69,032 वर्ग फुट जगह खाली की गई है और उसे उत्पादक वैकल्पिक उपयोग में लाया गया है ।
  • 26,312 फाइलों की समीक्षा की गई है. साथ ही, 13,954 फाइलों को हटाने के लिए चिन्हित किया गया है, जिनमें से 11,431 फाइलों को हटा दिया गया है।

डीओएसईएंडएल के सचिव श्री संजय कुमार ने 10 अक्टूबर 2023 को मंत्रालय और उसके स्वायत्त निकायों के नोडल अधिकारियों के साथ एक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए ठोस प्रयास करने तथा विशेष अभियान 3.0 के दौरान स्कूलों एवं संस्थानों की सर्वोत्तम प्रथाओं को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से सामने लाने पर बल दिया गया। बैठक में अभियान के दौरान मौजूदा इको क्लबों के पुनरुद्धार सहित सभी केवीएस, जेएनवी और सीबीएसई स्कूलों में संतृप्ति मोड में इको क्लब खोलने का भी फैसला लिया गया। ये क्लब अनुकरणीय प्रथाओं के रूप में कार्य करते हुए मिशन लाइफ और कंपोस्टिंग से संबंधित गतिविधियों में शामिल होंगे।

विशेष अभियान 3.0 के दौरान, संस्थानों और स्कूलों की पूरी प्रतिबद्धता दुनिया के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण स्थापित कर रही है। उदाहरण के लिए सीमा पार कतर के दोहा में शांति निकेतन इंडियन स्कूल के छात्र सक्रिय रूप से स्वच्छता के संदेश को आगे बढ़ा रहे हैं। इस बीच केंद्रीय विद्यालय, सीएलआरआई, चेन्नई ने प्लास्टिक की बोतलों को ड्रिप सिंचाई उपकरणों में बदलने का पर्यावरण के अनुकूल शानदार विचार पेश किया है। इसके अतिरिक्त, स्कूल पर्यावरणीय स्थिरता के प्रति प्रतिबद्धता प्रदर्शित करते हुए खाद गड्ढों का उपयोग करने में भी अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं।

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