एमसीबी, छत्तीसगढ़। मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत अंकिता सोम के मार्गदर्शन में जनपद पंचायत मनेंद्रगढ़ अंतर्गत ग्राम पंचायतों में ग्रामीण विकास की तस्वीर तेजी से बदल रही है। क्षेत्र की विभिन्न पंचायतों में कुल 151 नग आजीविका डबरी निर्माण कार्य स्वीकृत किए गए हैं और अधिकांश कार्य प्रगति पर हैं। अब इन कार्यों को विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) अर्थात VB-G RAM G (विकसित भारत जी राम जी) Act, 2025 की भावना से जोड़ा गया है, जिसका मूल मंत्र है “सम्मान की रोटी, हक का रोजगार 125 दिन काम, सबका अधिकार” । इस नई व्यवस्था के तहत ग्रामीण परिवारों को मजदूरी के साथ स्थायी आजीविका, जल सुरक्षा और जलवायु अनुकूल विकास का लाभ सुनिश्चित किया जा रहा है।
जनपद पंचायत स्तर पर पात्र ग्रामीणों को चिन्हित कर उनकी स्वयं की भूमि पर आजीविका डबरी निर्माण स्वीकृत किया जा रहा है। इसका सीधा लाभ यह है कि मनरेगा के माध्यम से उन्हें तात्कालिक रोजगार मिल रहा है और भविष्य में वही डबरी मत्स्य पालन, सब्जी उत्पादन, बाड़ी विकास, पशुपालन और सिंचाई के लिए उपयोगी बन रही है। उदाहरण के तौर पर कई गांवों में जहां पहले वर्षा के बाद खेत सूख जाते थे और रबी फसल नहीं हो पाती थी, अब डबरी के पानी से किसानों ने सब्जी उत्पादन शुरू कर अतिरिक्त आय अर्जित की है। इससे परिवारों की आय में बढ़ोतरी हो रही है और जीवन स्तर में सुधार दिखाई दे रहा है।
VB-G RAM G अधिनियम 2025 के तहत 125 दिनों की रोजगार गारंटी का प्रावधान ग्रामीणों के लिए बड़ी राहत है। पहले सीमित दिनों के रोजगार से परिवारों की जरूरतें पूरी करना कठिन होता था, वहीं अब अतिरिक्त कार्य दिवस मिलने से मजदूरों को वर्ष भर काम की बेहतर उपलब्धता मिलेगी। यदि किसी पात्र परिवार को समय पर काम उपलब्ध नहीं होता तो बेरोजगारी भत्ते का प्रावधान भी सुनिश्चित किया गया है, जिससे अधिकार आधारित व्यवस्था मजबूत होती है। समय पर मजदूरी भुगतान को प्राथमिकता दी जा रही है और भुगतान में देरी होने पर मुआवजे की व्यवस्था भी अधिनियम की प्रमुख विशेषता है। इससे ग्रामीणों का विश्वास बढ़ा है और पारदर्शिता मजबूत हुई है।
विकसित भारत–जी राम जी का फोकस केवल रोजगार सृजन तक सीमित नहीं है, बल्कि जल सुरक्षा और जल संरक्षण पर भी केंद्रित है। डबरी निर्माण के माध्यम से वर्षा जल संचयन, भू-जल पुनर्भरण और सिंचाई क्षमता में वृद्धि हो रही है। जिन गांवों में गर्मी के दिनों में पेयजल संकट गहराता था, वहां अब जल स्रोतों के पुनर्जीवन और वाटरशेड विकास कार्यों से स्थिति में सुधार की उम्मीद जगी है। वनीकरण गतिविधियों के साथ यह पहल पर्यावरण संरक्षण और क्लाइमेट रेज़िलिएंस को भी मजबूत करेगी। जिन क्षेत्रों में ढलान वाली भूमि पर पानी बहकर नष्ट हो जाता था, वहां डबरियों और वाटरशेड संरचनाओं से पानी को रोका जा रहा है, जिससे मिट्टी की उर्वरता और भू-जल स्तर में सुधार हो रहा है।
विकसित ग्राम पंचायत योजना (VGPP) के माध्यम से योजनाओं का तालमेल स्थापित किया जा रहा है। कन्वर्जेंस की नीति के तहत मनरेगा, कृषि विभाग, उद्यानिकी, मत्स्य पालन और वन विभाग की योजनाओं को एकीकृत किया जा रहा है ताकि एक ही कार्य से बहुआयामी लाभ मिल सके। जहां डबरी बनी है, वहां कृषि विभाग की सलाह से सब्जी उत्पादन और मत्स्य विभाग की सहायता से मछली पालन शुरू कराया जा रहा है। इसे सैचुरेशन आधारित प्लानिंग कहा जा रहा है, जिसमें लक्ष्य है कि पात्र हर परिवार तक योजनाओं का लाभ पहुंचे और कोई भी वंचित न रहे। सम्पूर्ण-सरकार दृष्टिकोण से ग्रामीण विकास के सभी घटकों को एक मंच पर जोड़कर बेहतर गारंटी और कुशल शासन सुनिश्चित किया जा रहा है।
तकनीक आधारित सशक्तिकरण भी इस अधिनियम का महत्वपूर्ण पहलू है। कार्यों की ऑनलाइन मॉनिटरिंग, भू-टैगिंग और डिजिटल भुगतान व्यवस्था से पारदर्शिता बढ़ी है। ग्राम सभा की भागीदारी, जनसंवाद और जनसहभागिता के माध्यम से विकास कार्यों को प्राथमिकता के साथ पूरा किया जा रहा है। पंचायतों को सर्कुलर इकॉनमी की दिशा में सक्षम बनाने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे स्थानीय संसाधनों का स्थानीय स्तर पर उपयोग हो और गांव आत्मनिर्भर बनें।
एम्पावरमेंट, ग्रोथ, कन्वर्जेंस और सैचुरेशन पर आधारित यह मॉडल मनेंद्रगढ़ में जमीनी स्तर पर परिवर्तन की मिसाल बनता जा रहा है। जल सुरक्षा, ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर, आजीविका आधारित संरचनाएं और जलवायु अनुकूल विकास के माध्यम से एक खुशहाल और मजबूत ग्रामीण भारत की परिकल्पना साकार होती दिख रही है। 151 आजीविका डबरियों के निर्माण से शुरू हुआ यह अभियान विकसित भारत की व्यापक सोच से जुड़कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था में स्थायी परिवर्तन की दिशा में अग्रसर है।

