Friday, January 16, 2026
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जिले की 25 उपार्जन केंद्रों में धान खरीदी का ऐतिहासिक रिकॉर्ड, 6 लाख 32 हजार क्विंटल से अधिक उपार्जन

एमसीबी, छत्तीसगढ़। जिले में खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के अंतर्गत धान खरीदी ने नया कीर्तिमान स्थापित किया है। जिले में पारदर्शी, सुव्यवस्थित और किसान-हितैषी धान खरीदी व्यवस्था के तहत अब तक 6 लाख 32 हजार 379 क्विंटल धान का उपार्जन दर्ज किया जा चुका है, जो जिले के इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। इसमें से 1 लाख 23 हजार 660 क्विंटल धान का उठाव भी पूर्ण किया जा चुका है, जबकि 5 लाख 09 हजार 119 क्विंटल धान सुरक्षित रूप से भंडारण में शेष है।
उल्लेखनीय है कि जिले में अब तक की गई पूरी खरीदी मोटा धान की श्रेणी में ही दर्ज की गई है, जबकि पतला एवं सरना धान की खरीदी शून्य रही है। यह स्थिति शासन की स्पष्ट नीति, सख्त निगरानी व्यवस्था और गुणवत्ता नियंत्रण की प्रभावी कार्यप्रणाली को दर्शाती है, जिससे किसानों और प्रशासन दोनों का भरोसा और मजबूत हुआ है।
जिले के 25 उपार्जन केंद्रों पर किसानों की ऐतिहासिक भागीदारी देखने को मिल रही है। कछोड़ उपार्जन केंद्र में 21926.00 क्विंटल, कमर्जी में 16693.60 क्विंटल, केल्हारी में 40836.40 क्विंटल, कोटाडोल में 17404.00 क्विंटल, रापा में 9274.60 क्विंटल, कटकोना में 25658.40 क्विंटल, कोडा में 38838.00 क्विंटल तथा कौड़ीमार में 33100.00 क्विंटल धान की खरीदी दर्ज की गई है। इसी प्रकार खड़गवां में 32609.00 क्विंटल, बरदर में 25192.00 क्विंटल, रतनपुर में 19513.20 क्विंटल, सिंगहत में 10915.60 क्विंटल, कंजिया में 21153.60 क्विंटल और कुवांरपुर में 36880.80 क्विंटल धान का उपार्जन हुआ है। इसी क्रम में कठौतिया में 18115.60 क्विंटल, चैनपुर में 25716.40 क्विंटल, बंजी में 21442.40 क्विंटल, जनकपुर में 39457.20 क्विंटल, बहरासी में 18633.60 क्विंटल, डोडकी में 26142.00 क्विंटल, नागपुर में 17742.40 क्विंटल, बरबसपुर में 23894.40 क्विंटल, माड़ीसरई में 40617.20 क्विंटल तथा सिंगरौली उपार्जन केंद्र में 33617.60 क्विंटल धान की खरीदी की गई है। यह संपूर्ण आंकड़ा जिले के शहरी से लेकर दूरस्थ ग्रामीण अंचलों तक किसानों की सक्रिय भागीदारी और शासन व्यवस्था पर उनके गहरे भरोसे को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।
धान खरीदी के ये आंकड़े इस बात का प्रमाण हैं कि शासन की व्यवस्था केवल कागजों तक सीमित नहीं रही, बल्कि जमीनी स्तर पर प्रभावी रूप से लागू हुई है। सुव्यवस्थित टोकन प्रणाली, पारदर्शी डिजिटल तौल प्रक्रिया और समयबद्ध खरीदी ने किसानों की वर्षों पुरानी आशंकाओं को दूर किया है। बड़ी संख्या में किसान उपार्जन केंद्रों तक पहुंच रहे हैं और शासन द्वारा लागू की गई तकनीक आधारित व्यवस्था पर पूरा भरोसा जता रहे हैं। खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए केवल धान विक्रय का सत्र नहीं, बल्कि भरोसे, सम्मान और आत्मनिर्भरता का नया अध्याय बनकर उभरा है। प्रति एकड़ 21 क्विंटल तक खरीदी की नीति, 3100 रुपये प्रति क्विंटल का समर्थन मूल्य, डिजिटल तौल कांटा, फोटो आधारित सत्यापन, रियल टाइम डेटा एंट्री और त्वरित भुगतान प्रणाली ने यह सुनिश्चित कर दिया है कि किसान की मेहनत पूरी तरह सुरक्षित रहे। भुगतान सीधे किसानों के बैंक खातों में पहुंचने से उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है और शासन-प्रशासन के प्रति विश्वास लगातार और गहराता जा रहा है।

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