Thursday, March 5, 2026
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वर्दी में लौटे पूर्व छात्र: स्कूल में हुई सम्मान, सेवा और सौहार्द्र की अनूठी मिसाल

तिरुवनंतपुरम/ कझाकूट्टम स्थित सैनिक स्कूल का वातावरण शनिवार को गर्व, प्रेरणा और भावनाओं से भर गया जब 1985 बैच के चार पूर्व छात्र जो आज भारतीय सशस्त्र बलों के शीर्ष पदों पर कार्यरत हैं अपने विद्यालय लौटे लेफ्टिनेंट जनरल विजय बी नायर मेजर जनरल विनोद टी मैथ्यू मेजर जनरल हरि बी पिल्लई और एयर वाइस मार्शल केवी सुरेंद्रन नायर जब स्कूल परिसर में कदम रखे तो हर कोना उनकी पुरानी यादों से गूंज उठा इस अवसर पर आयोजित पूर्व छात्र सम्मेलन में एक और विशिष्ट पूर्व छात्र एयर मार्शल बालकृष्णन मणिकांतन मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों ने स्कूल में स्थापित 150 किलोवाट क्षमता के सौर ऊर्जा संयंत्र का उद्घाटन भी किया इस मिलन के दौरान केरल राज्य सहकारी कृषि ग्रामीण विकास बैंक के पूर्व क्षेत्रीय प्रबंधक एमए अनिल कुमार जो इसी बैच के छात्र रह चुके हैं उन्होंने बताया कि उनके बैच के लगभग 14 छात्र सशस्त्र बलों में शामिल हुए थे उन्होंने यह भी साझा किया कि कैसे विद्यालय में सेवारत अधिकारियों के दौरे ने उन्हें सैन्य सेवा के लिए प्रेरित किया पलक्कड़ निवासी लेफ्टिनेंट जनरल विजय नायर इस समय उधमपुर स्थित भारतीय सेना की उत्तरी कमान का नेतृत्व कर रहे हैं और उन्होंने श्रीलंका में भारतीय शांति सेना तथा कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियानों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है मेजर जनरल विनोद मैथ्यू जो थोडुपुझा से हैं वर्तमान में कर्नाटक-केरल उप क्षेत्र के जनरल ऑफिसर कमांडिंग के रूप में कार्यरत हैं और उन्होंने वायनाड में भूस्खलन के दौरान बचाव कार्यों के अलावा पूर्वोत्तर राज्यों में उग्रवाद से भी निपटा है मेजर जनरल हरि पिल्लई जो कुंदरा के हैं वर्तमान में बेंगलुरु क्षेत्रीय भर्ती क्षेत्र के अतिरिक्त महानिदेशक हैं और उनके पास भी पूर्वोत्तर और कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियानों का अनुभव है एयर वाइस मार्शल सुरेंद्रन नायर जो त्रिशूर से हैं देश के सर्वोत्तम लड़ाकू पायलटों में गिने जाते हैं और मिग 21 मिग 29 तथा सुखोई 30 जैसे विमान उड़ा चुके हैं वे वर्तमान में वेलिंगटन स्थित डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज में मुख्य प्रशिक्षक की भूमिका निभा रहे हैं इस सम्मेलन में देश-विदेश से आए डॉक्टर इंजीनियर पायलट नौकरशाह और संयुक्त राष्ट्र में कार्यरत अनेक पूर्व छात्रों ने भी भाग लिया लेकिन इस आयोजन की सबसे प्रेरक बात थी उन चार सहपाठियों की साझा यात्रा जिन्होंने एक साथ सपने देखे एक साथ प्रशिक्षण पाया और अंततः राष्ट्र सेवा के पथ पर अग्रणी बने ।

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