Thursday, April 2, 2026
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सफलता की कहानी: किसान बिहारी सिंह की कहानी बनी शासन की सफल प्रणाली का सशक्त प्रमाण

एमसीबी। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में लागू की गई तकनीक आधारित डिजिटल धान खरीदी व्यवस्था आज केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि किसानों के भरोसे का मजबूत आधार बन चुकी है। यह व्यवस्था जमीनी स्तर पर कितनी प्रभावी और भरोसेमंद है, इसका जीवंत उदाहरण ग्राम कोड़ा के किसान बिहारी सिंह की कहानी से सामने आता है।

किसान बिहारी सिंह ने कोड़ा उपार्जन केंद्र में कुल 77.20 क्विंटल धान का सफलतापूर्वक विक्रय किया। शासन द्वारा निर्धारित 3100 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य तथा प्रति एकड़ 21 क्विंटल तक खरीदी की नीति के अंतर्गत उन्हें अपनी संपूर्ण उपज का उचित एवं लाभकारी मूल्य प्राप्त हुआ। पूरी प्रक्रिया पारदर्शी, सरल और समयबद्ध रही। धान विक्रय हेतु किसान बिहारी सिंह का टोकन ऑफलाइन माध्यम से जारी किया गया था, इसके बावजूद उपार्जन केंद्र पर उन्हें किसी प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करना पड़ा। इससे यह स्पष्ट होता है कि डिजिटल प्रणाली के साथ-साथ उन किसानों के लिए भी प्रभावी वैकल्पिक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं, जो ऑनलाइन प्रक्रियाओं से पूर्णतः सहज नहीं हैं।

उपार्जन केंद्र में किसानों के लिए बैठने की समुचित व्यवस्था, पेयजल सहित अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई गई थीं। डिजिटल कांटे से सटीक तौल, सुव्यवस्थित भुगतान प्रणाली तथा भीड़-भाड़ से मुक्त वातावरण ने पूरी प्रक्रिया को भरोसेमंद और सुगम बना दिया। अपने अनुभव साझा करते हुए किसान बिहारी सिंह ने बताया कि पूर्व वर्षों में धान विक्रय के दौरान अनिश्चितता और भुगतान में देरी आम बात थी, किंतु इस वर्ष की तकनीक आधारित व्यवस्था ने उन्हें मानसिक और आर्थिक दोनों स्तरों पर राहत प्रदान की है। छत्तीसगढ़ की यह डिजिटल धान खरीदी प्रणाली आज किसानों के लिए पारदर्शिता, विश्वास और सुशासन का एक सशक्त उदाहरण बनकर उभर रही है।

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