Wednesday, February 4, 2026
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हाईकोर्ट के आदेश अनुसार सहायक शिक्षक के रिक्त पदों पर डी.एड. प्रशिक्षित अभ्यर्थियों की नियुक्ति प्रक्रिया शीघ्र प्रारंभ हो

रायपुर, छत्तीसगढ़। प्रदेश के डीएड प्रशिक्षित अभ्यर्थियों से जुड़ी एक अत्यंत गंभीर, संवेदनशील और मानवीय समस्या को लेकर अनुसूचित जनजाति शासकीय सेवक विकास संघ छत्तीसगढ़ ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। पत्र के माध्यम से संघ ने प्रदेश के उन सैकड़ों आदिवासी युवाओं की पीड़ा से अवगत कराया है जो आवश्यक शैक्षणिक योग्यता और प्रशिक्षण होने के बावजूद विगत दो वर्षों से नियुक्ति की प्रतीक्षा में लगातार संघर्ष कर रहे हैं। संघ को प्रस्तुत प्रतिवेदन में अनुसूचित जनजाति वर्ग के डीएड प्रशिक्षित अभ्यर्थियों ने अत्यंत व्यथित मन से बताया है कि बेरोजगारी के कारण वे और उनके परिवार गहरे आर्थिक संकट और मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं। लंबे समय से रोजगार नहीं मिलने से इन युवाओं का आत्मविश्वास टूट रहा है और भविष्य अंधकारमय होता जा रहा है।

अभ्यर्थियों ने यह भी अवगत कराया है कि शिक्षक भर्ती 2023 के अंतर्गत सहायक शिक्षक के लगभग 2300 पद रिक्त हैं जिन पर अब तक नियुक्ति प्रक्रिया प्रारंभ नहीं हो सकी है। इनमें से लगभग 1600 पद अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित हैं। यह स्थिति तब और गंभीर हो जाती है जब इस विषय में उच्च न्यायालय बिलासपुर द्वारा याचिका क्रमांक WPS 3052/2025, 3999/2025 एवं 3946/2025 में 26 सितंबर 2025 को स्पष्ट आदेश पारित किया जा चुका है। माननीय उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सहायक शिक्षक के रिक्त पदों पर नियुक्ति की संपूर्ण प्रक्रिया अनिवार्य रूप से दो माह की समय-सीमा के भीतर पूर्ण की जाए। इसके बावजूद अब तक नियुक्ति प्रक्रिया प्रारंभ नहीं होना न केवल न्यायालयीन आदेश की अवहेलना की स्थिति उत्पन्न करता है बल्कि प्रदेश के आदिवासी युवाओं के साथ गंभीर अन्याय भी दर्शाता है।

इस पूरे मामले में अनुसूचित जनजाति शासकीय सेवक विकास संघ छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष आर एन ध्रुव ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि वे उच्च न्यायालय के आदेश का सम्मान करते हुए तथा अनुसूचित जनजाति वर्ग के बेरोजगार युवाओं के व्यापक हित को सहानुभूतिपूर्वक ध्यान में रखते हुए सहायक शिक्षक के रिक्त पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया को तत्काल प्रारंभ कराने के निर्देश संबंधित विभागों को दें और यह सुनिश्चित करें कि प्रक्रिया निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण हो। संघ का कहना है कि यदि शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया तो प्रदेश के सैकड़ों योग्य आदिवासी युवा न्याय से वंचित रह जाएंगे। यह विषय केवल रोजगार का नहीं बल्कि सामाजिक न्याय, संवैधानिक अधिकार और आदिवासी युवाओं के भविष्य से जुड़ा हुआ है, जिस पर अब सरकार को निर्णायक कदम उठाने की आवश्यकता है।

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