Friday, January 16, 2026
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बर्खास्त आदिवासी शिक्षकों को बहाली का अवसर देने की मांग, आर एन ध्रुव ने शासन से की अपील

रायपुर, छत्तीसगढ़। त्रि-स्तरीय पंचायत आम निर्वाचन 2025 के दौरान निर्वाचन कर्तव्य में लापरवाही के आरोप में बर्खास्त किए गए दो आदिवासी शिक्षकों को पुनः सेवा में बहाल कर सुधार का अवसर दिए जाने की मांग तेज हो गई है। अनुसूचित जनजाति शासकीय सेवक विकास संघ छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष एवं गोंडवाना गोंड महासभा के राष्ट्रीय सचिव आर एन ध्रुव ने इस संबंध में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव, अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष रूपसिंह मंडावी, मुख्य सचिव तथा सरगुजा संभाग के आयुक्त को पत्र लिखकर मानवीय और सामाजिक दृष्टिकोण अपनाने की अपील की है।

उल्लेखनीय है कि 19 फरवरी 2025 को त्रि-स्तरीय पंचायत निर्वाचन के सामग्री वितरण स्थल शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय ग्राम लालपुर परिसर में शासकीय प्राथमिक शाला हरकाटन के सहायक शिक्षक अशोक कुमार सिंह तथा शासकीय प्राथमिक शाला चूकतीपानी विकासखंड मनेंद्रगढ़ के सहायक शिक्षक अभय कुजूर के निर्वाचन कर्तव्य क्षेत्र में शराब सेवन की स्थिति में उपस्थित पाए जाने का आरोप लगा। इस मामले में कार्यालय कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी मनेंद्रगढ़–चिरमिरी–भरतपुर द्वारा दोनों शिक्षकों को बर्खास्त किए जाने की अनुशंसा की गई।

आर एन ध्रुव ने पत्र में उल्लेख किया है कि आदिवासी समाज में कुछ पारंपरिक एवं सामाजिक अवसरों पर शराब सेवन की परंपरा रही है और कई बार रात में सेवन की गई शराब की गंध अगले दिन तक बनी रह सकती है। केवल गंध या संदेह के आधार पर यह निष्कर्ष निकाल लेना कि कर्मचारी ने ड्यूटी के दौरान शराब का सेवन किया है, न्यायसंगत नहीं माना जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जनजाति वर्ग के अधिकारी-कर्मचारियों के मामलों में राज्य शासन के सामान्य प्रशासन विभाग के प्रावधानों के अनुसार पहले समझाइश देकर सुधार का अवसर दिया जाना चाहिए।

आर एन ध्रुव ने आग्रह किया कि यदि जाने-अनजाने में कोई त्रुटि हुई भी हो तो दोनों आदिवासी शिक्षकों को बर्खास्त करने के बजाय पुनः सेवा में बहाल कर एक अवसर दिया जाए, ताकि वे भविष्य में अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन और अधिक सतर्कता व अनुशासन के साथ कर सकें। उन्होंने कहा कि कठोर दंड के बजाय सुधारात्मक दृष्टिकोण अपनाना न केवल संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप है, बल्कि सामाजिक न्याय की भावना को भी मजबूत करता है।

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