कोरबा, छत्तीसगढ़। जिले के पोंड़ी उपरोड़ा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत पुटीपखना के आश्रित ग्राम बीजाड़ांड़ में रूंगटा कोल कंपनी के प्रस्तावित कोल ब्लॉक को निरस्त किए जाने की मांग को लेकर ग्रामीणों का संघर्ष अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। एक माह से अधिक समय से जारी अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन लगातार तेज होता जा रहा है और आंदोलनकारियों का कहना है कि उनकी आवाज अब दबाई नहीं जा सकती। धरनास्थल पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में ग्रामीण एकत्रित होकर अपने जल, जंगल और जमीन की सुरक्षा के संकल्प को दोहरा रहे हैं।
यह आंदोलन गोंडवाना गणतंत्र पार्टी की ब्लॉक इकाई पसान तथा तिरिया जंगल बचाओ संघर्ष समिति के नेतृत्व में संचालित हो रहा है। आंदोलनकारियों का आरोप है कि कोल ब्लॉक से क्षेत्र की पर्यावरणीय संतुलन, आजीविका और आदिवासी समुदाय की पारंपरिक जीवनशैली पर गहरा प्रभाव पड़ेगा। ग्रामीणों का कहना है कि बिना व्यापक जनसहमति और पारदर्शी प्रक्रिया के किसी भी प्रकार की खनन गतिविधि स्वीकार्य नहीं है। उनका स्पष्ट मत है कि विकास के नाम पर स्थानीय निवासियों के अधिकारों और अस्तित्व से समझौता नहीं किया जा सकता।
धरनारत ग्रामीणों ने शासन और प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि एक माह से अधिक समय बीत जाने के बावजूद कोई संतोषजनक वक्तव्य, ठोस पहल या संवाद की पहल नहीं की गई है, जिससे क्षेत्र में असंतोष और आक्रोश बढ़ता जा रहा है। आंदोलनकारियों ने इसे प्रशासनिक उदासीनता बताते हुए कहा कि यदि समय रहते इस विषय पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो हालात और गंभीर हो सकते हैं।
ग्रामीणों ने चेतावनी भरे स्वर में कहा है कि रूंगटा कोल ब्लॉक को निरस्त करने की मांग पूरी नहीं होने की स्थिति में आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि संघर्ष पूरी तरह लोकतांत्रिक और संवैधानिक दायरे में रहकर किया जा रहा है, किंतु यदि अनदेखी जारी रही तो जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी। बीजाड़ांड़ में जारी यह धरना अब केवल एक गांव का आंदोलन नहीं रहा, बल्कि क्षेत्रीय जनभावना का प्रतीक बन चुका है, जहां लोग अपने अधिकारों और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के लिए एकजुट दिखाई दे रहे हैं।

