Monday, February 23, 2026
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बलरामपुर में बढ़ा आक्रोश, रामनरेश लकड़ा हत्याकांड को लेकर सर्व आदिवासी समाज सख्त, बोले—दोषियों को मिले कड़ी सजा

कुसमी, छत्तीसगढ़। हंसपुर में आदिवासी युवक रामनरेश लकड़ा की सामूहिक हत्या की घटना ने पूरे सरगुजा संभाग सहित छत्तीसगढ़ के आदिवासी समाज को झकझोर कर रख दिया है। इस दर्दनाक और संवेदनशील मामले को गंभीरता से लेते हुए सर्व आदिवासी समाज सरगुजा संभाग का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधि मंडल बलरामपुर जिले में सक्रिय हुआ और प्रशासन को विधिवत सूचना देने के बाद सीधे पीड़ित परिवार के गृह ग्राम हंसपुर, विकासखंड कुसमी पहुंचकर घटनास्थल का निरीक्षण किया। प्रतिनिधि मंडल ने परिजनों से मुलाकात कर पूरे घटनाक्रम की बारीकी से जानकारी ली तथा आसपास के ग्रामीणों से भी बातचीत कर प्रारंभिक तथ्यों को संकलित किया।समाज के पदाधिकारियों ने इस घटना को केवल एक आपराधिक वारदात नहीं बल्कि आदिवासी समाज की सुरक्षा और सम्मान से जुड़ा अत्यंत गंभीर विषय बताया। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार से सामूहिक रूप से हत्या की घटना सामने आई है, वह कई सवाल खड़े करती है और इसकी निष्पक्ष, पारदर्शी एवं त्वरित जांच अत्यंत आवश्यक है। प्रतिनिधि मंडल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि जांच प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर लापरवाही, पक्षपात या तथ्य छिपाने का प्रयास पाया गया तो समाज इसे सार्वजनिक करेगा और व्यापक स्तर पर न्याय की लड़ाई लड़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि आदिवासी समाज अब किसी भी अन्याय पर मौन नहीं रहेगा और संवैधानिक अधिकारों के तहत लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष करेगा।

प्रतिनिधि मंडल में सरगुजा संभाग अध्यक्ष डॉ. अमृत सिंह मरावी के नेतृत्व में संभागीय महासचिव मोतीलाल पैकरा, सूरजपुर जिला अध्यक्ष ब्रिजमोहन सिंह गोंड, जिला संरक्षक जुनास एक्का, जिला कोषाध्यक्ष जेम्स कुजूर, सह जिला मीडिया प्रभारी अशोक तिर्की, युवा प्रभाग सूरजपुर के जिला अध्यक्ष भानु प्रताप सिंह पोया, सरगुजा कार्यकारिणी अध्यक्ष अनूक प्रताप सिंह टेकाम, जिला महासचिव तरुण भगत, देव प्रसाद टोप्पो, सुमेर सिंह मरावी, मनधारी मरकाम, बलरामपुर जिला कार्यकारिणी अध्यक्ष चंद्रशेखर पोर्ते तथा सामाजिक कार्यकर्ता रिपिक रोहन नगेशिया और गोपीचंद नगेशिया सहित अनेक पदाधिकारी उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में कहा कि पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने तक समाज उनके साथ मजबूती से खड़ा रहेगा।गांव में पसरे भय और आक्रोश के बीच समाज के प्रतिनिधियों ने परिजनों को ढांढस बंधाया और भरोसा दिलाया कि यह मामला किसी भी स्थिति में दबने नहीं दिया जाएगा। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि दोषियों की शीघ्र गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाए, निष्पक्ष जांच के लिए उच्च स्तरीय टीम गठित की जाए तथा पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा और सुरक्षा प्रदान की जाए। प्रतिनिधि मंडल ने यह भी कहा कि इस प्रकार की घटनाएं क्षेत्र में सामाजिक सौहार्द और कानून व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लगाती हैं, इसलिए शासन-प्रशासन को संवेदनशीलता और तत्परता के साथ कार्रवाई करनी चाहिए।

सर्व आदिवासी समाज ने स्पष्ट किया है कि न्याय की इस लड़ाई में वह हर संवैधानिक और लोकतांत्रिक विकल्प अपनाएगा। समाज की ओर से यह भी संकेत दिए गए हैं कि यदि शीघ्र और संतोषजनक कार्रवाई नहीं हुई तो व्यापक स्तर पर आंदोलन की रूपरेखा तय की जाएगी। हंसपुर की यह घटना अब केवल एक गांव की नहीं रह गई है, बल्कि पूरे आदिवासी समाज की अस्मिता और सुरक्षा से जुड़ा सवाल बन चुकी है, जिस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।

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