Sunday, February 22, 2026
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मनौरा में गूंजा सामाजिक क्रांति का शंखनाद: केराम कमांडो प्रशिक्षण शिविर का ऐतिहासिक समापन

 गौरेला–पेंड्रा–मरवाही, छत्तीसगढ़। जिले के ग्राम मनौरा की धरती 19 फरवरी 2026 को ऐतिहासिक ऊर्जा और वैचारिक चेतना से सराबोर नजर आई, जब केराम कमांडो सरगुजा (KCS) प्रशिक्षण शिविर का तीसरा और अंतिम दिवस उत्साह, अनुशासन और संकल्प के साथ सम्पन्न हुआ। तीन दिनों तक चले इस प्रशिक्षण शिविर ने केवल शारीरिक प्रशिक्षण का पाठ नहीं पढ़ाया, बल्कि सामाजिक जागरण, बौद्धिक सशक्तिकरण और संगठनात्मक मजबूती का एक ऐसा मॉडल प्रस्तुत किया, जिसे आने वाले समय में गोंडवाना समग्र विकास क्रांति आंदोलन की दिशा और दशा तय करने वाला महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। शिविर के अंतिम दिन का वातावरण जोश, प्रतिबद्धता और दूरदर्शी नेतृत्व की प्रेरणा से ओतप्रोत रहा।इस अवसर पर जयनाथ सिंह केराम जो राष्ट्रीय प्रवक्ता और ICKBA के चीफ इंस्ट्रक्टर के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान रखते हैं, के नेतृत्व में यह प्रशिक्षण शिविर एक संगठित, जागरूक और आत्मसम्मान से परिपूर्ण समाज के निर्माण की स्पष्ट रूपरेखा प्रस्तुत करता दिखा। अपने संबोधन में उन्होंने स्पष्ट कहा कि समाज की वास्तविक ताकत केवल संख्या में नहीं, बल्कि विचार, ज्ञान और अनुशासन में निहित होती है। उन्होंने केराम कमांडो की अवधारणा को केवल एक संगठनात्मक ढांचा नहीं, बल्कि सामाजिक पुनर्जागरण का माध्यम बताते हुए कहा कि जब युवा अपने इतिहास, अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक होंगे, तभी शोषण और अन्याय के विरुद्ध सशक्त आवाज बुलंद हो सकेगी।इस तीन दिवसीय इस प्रशिक्षण में प्रतिभागियों को शारीरिक दक्षता, आत्मरक्षा, सामूहिक अनुशासन, नेतृत्व क्षमता, वैचारिक स्पष्टता और संगठन संचालन के विविध आयामों से परिचित कराया गया। अंतिम दिन विशेष सत्रों के माध्यम से यह समझाया गया कि समाज के समग्र विकास के लिए केवल आंदोलन नहीं, बल्कि ठोस योजना, शिक्षा, आर्थिक सशक्तिकरण और सांस्कृतिक आत्मगौरव की आवश्यकता होती है। वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि गोंडवाना समाज की परंपराएं, ज्ञान परंपरा और सामुदायिक जीवन पद्धति आज भी प्रासंगिक है, आवश्यकता है तो उसे आधुनिक संदर्भ में पुनर्स्थापित करने की। इस शिविर के समापन अवसर पर गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष उदय सिंह पंद्राम और रितु पंद्राम की गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन को विशेष महत्व प्रदान किया। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि संगठन की शक्ति उसके प्रशिक्षित और जागरूक कार्यकर्ताओं में निहित होती है। केराम कमांडो जैसे प्रशिक्षण शिविर युवाओं को केवल शारीरिक रूप से सक्षम नहीं बनाते, बल्कि उन्हें सामाजिक उत्तरदायित्व के लिए भी तैयार करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि गोंडवाना समग्र विकास क्रांति आंदोलन का उद्देश्य केवल राजनीतिक परिवर्तन नहीं, बल्कि सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक आत्मनिर्भरता का व्यापक अभियान है।राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य फूल सिंह पेन्द्रा जी ने अपने विचार रखते हुए कहा कि समाज का भविष्य युवाओं के हाथ में है और यदि युवा संगठित होकर सकारात्मक दिशा में कार्य करें तो कोई भी शक्ति उन्हें आगे बढ़ने से नहीं रोक सकती। उन्होंने केराम कमांडो के अनुशासन और प्रतिबद्धता की सराहना करते हुए इसे आने वाले समय में समाज की ढाल और शक्ति दोनों बताया। दादा हीरा सिंह मरकाम गोंडवाना कृषि विद्यालय घिनौची के संचालक लखन सिंह वाकरे जी ने ग्रामीण और कृषि आधारित विकास की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि समग्र विकास का अर्थ केवल शहरों का विकास नहीं, बल्कि गांवों की आत्मनिर्भरता और कृषि को सशक्त बनाना भी है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे आधुनिक कृषि तकनीकों, सामूहिक खेती और स्वावलंबन के मॉडल को अपनाकर समाज को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने में योगदान दें।जिला उपाध्यक्ष जीपीएम माननीय करमदास पुरी जी और माननीय निरंजन ओट्टी जी की उपस्थिति ने स्थानीय संगठनात्मक एकजुटता का संदेश दिया। दोनों नेताओं ने कहा कि केराम कमांडो का यह प्रशिक्षण केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन की दिशा में उठाया गया ठोस कदम है। उन्होंने विश्वास जताया कि इस शिविर से प्रशिक्षित युवा अपने-अपने क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलाकर शिक्षा, संगठन और अधिकारों के प्रति लोगों को प्रेरित करेंगे। अंतिम दिवस पर सामूहिक शपथ ग्रहण का आयोजन भी किया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने समाज, संस्कृति और अधिकारों की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहने का संकल्प लिया। वातावरण में गूंजते नारों और अनुशासित पंक्तियों में खड़े युवाओं का उत्साह यह संकेत दे रहा था कि यह प्रशिक्षण केवल तीन दिनों का आयोजन नहीं, बल्कि दीर्घकालिक सामाजिक आंदोलन की शुरुआत है।

शिविर के दौरान विभिन्न विषयों पर समूह चर्चा, व्यावहारिक प्रशिक्षण और वैचारिक सत्र आयोजित किए गए, जिनमें सामाजिक न्याय, संवैधानिक अधिकार, शिक्षा का महत्व, संगठन विस्तार और आत्मरक्षा जैसे विषय प्रमुख रहे। प्रशिक्षकों ने स्पष्ट किया कि आधुनिक समय में संघर्ष केवल शारीरिक नहीं, बल्कि बौद्धिक और वैचारिक भी है। इसलिए ज्ञान को अस्त्र और संगठन को शक्ति बनाकर ही स्थायी परिवर्तन संभव है। मनौरा की इस ऐतिहासिक धरती पर सम्पन्न हुआ यह प्रशिक्षण शिविर गोंडवाना समग्र विकास क्रांति आंदोलन के लिए नई ऊर्जा का संचार करने वाला सिद्ध हुआ। तीन दिनों तक चली इस प्रक्रिया ने यह संदेश दिया कि जब नेतृत्व स्पष्ट हो, उद्देश्य व्यापक हो और युवा प्रतिबद्ध हों, तो परिवर्तन की राह स्वयं बनती जाती है। केराम कमांडो सरगुजा (KCS) का यह आयोजन आने वाले समय में सामाजिक जागरण, आत्मसम्मान और समग्र विकास के एक मजबूत अध्याय के रूप में याद किया जाएगा।

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