बलौदाबाजार। परीक्षा के समय बच्चों में तनाव, डर, घबराहट और बेचैनी होना सामान्य है, लेकिन सही जानकारी, मार्गदर्शन और सहयोग से इसे प्रभावी ढंग से संभाला जा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार अच्छे अंक लाने का अत्यधिक दबाव, माता-पिता और शिक्षकों की बढ़ी हुई अपेक्षाएं, पढ़ाई का अधिक बोझ, समय प्रबंधन की कमी, तुलना और प्रतियोगिता का डर, नींद की कमी, मोबाइल और सोशल मीडिया का अधिक उपयोग तथा असफलता की आशंका तनाव के प्रमुख कारण हैं। तनाव के शारीरिक लक्षणों में पढ़ाई में मन न लगना, सिरदर्द, थकान, आत्मविश्वास की कमी, नींद न आना, भूख कम लगना, अकेले रहने की इच्छा, घबराहट और दिल की धड़कन तेज होना शामिल हैं, जबकि मानसिक लक्षणों में चिड़चिड़ापन और बार-बार रोने का मन करना देखा जाता है। विद्यार्थियों के लिए रोज़ाना पढ़ाई का समय तय करना, बीच-बीच में ब्रेक लेना, छह से आठ घंटे की नींद, हल्का व्यायाम, संतुलित आहार, मोबाइल और सोशल मीडिया का सीमित उपयोग, अपनी समस्याएं भरोसेमंद व्यक्ति से साझा करना और खुद की तुलना दूसरों से न करना उपयोगी उपाय बताए गए हैं। माता-पिता से अपेक्षा की गई है कि वे अनावश्यक दबाव न डालें, अंकों से अधिक प्रयास की सराहना करें, सकारात्मक माहौल बनाएं और नियमित संवाद रखें। शिक्षकों की भूमिका बच्चों को प्रेरित करने, डर का माहौल न बनने देने और कमजोर विद्यार्थियों को विशेष सहयोग देने की है। मानसिक स्वास्थ्य परामर्श से आत्मविश्वास बढ़ता है, तनाव को सही दिशा मिलती है और गंभीर जोखिमों से बचाव संभव होता है।

