गरियाबंद, छत्तीसगढ़। राजिम कुंभ कल्प मेले के स्थानीय मंच पर 12 फरवरी को सांस्कृतिक कार्यक्रमों की एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियां देखने को मिलीं। इसी कड़ी में आमोदी (आरंग) के प्रवीण कुमार के जगराता ने ऐसा समां बांधा कि दर्शक और श्रद्धालु देवी भजनों पर झूमने को मजबूर हो गए। पूरा पंडाल माता के जयकारों से गूंज उठा। वहीं पोंड तोरला के दाऊराम भारती ने सतनाम भजन प्रस्तुत कर संत गुरु घासीदास बाबा की महिमा का गुणगान किया। भाठागांव रायपुर के अनीत साहू ने देवी दुर्गा के भजनों से भक्तिमय वातावरण निर्मित किया। राजिम की रानी मिरी टोली ने पंथी नृत्य से दर्शकों का मन मोह लिया, वहीं चारामा की विद्या दुर्गाशी ने बारहमासी नृत्य के माध्यम से वर्षभर के पर्वों को मंच पर जीवंत कर दिया।
दरबा की हेमा साहू द्वारा प्रस्तुत जस झांकी विशेष आकर्षण का केंद्र रही। जैसे ही झांकी में दुर्गा माता ने महिषासुर का वध किया, दर्शकों ने पुष्पवर्षा कर श्रद्धा व्यक्त की। पिपरछेड़ी (गरियाबंद) के चंदन कुमार ने आदिवासी नृत्य, तेंदूबाई (गरियाबंद) के ओमकुमार ने भुंजिया नृत्य के माध्यम से आदिवासी संस्कृति की झलक से दर्शकों को रूबरू कराया। नवापारा के परमेंद्र कुमार ने शिव भजन और रायपुर की गायत्री धीवर ने सुगम गायन से कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।
इसके अलावा राजिम के भूपेंद्र कुमार सोनकर की भजन संध्या, धनसुली के ओमप्रकाश का रामायण पाठ, रिको पलौद के राजेश बंजारे का सतनाम भजन, डूमरपाली के वेदप्रकाश साहू का मानसगान तथा अभनपुर के उधोराम साहू सेवा मंडली द्वारा माता के भजनों की प्रस्तुति ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। कार्यक्रम का संचालन खुमान सिंह ध्रुव एवं दीप्ती मैडम ने किया। संयोजक पुरुषोत्तम चंद्राकर, नोडल अधिकारी दिनेश्वरी साहू, संतोष सूर्यवंशी, राकेश साहू एवं तोमेश्वर देवांगन सहित अन्य कार्यक्रम को सफल बनाने में जुटे रहे।

