Sunday, February 15, 2026
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सफलता की कहानी : आजीविका डबरी से बदल रहा है लाई निवासी सोमारू का सामाजिक जीवन

एमसीबी, छत्तीसगढ़। मेहनती हाथों को यदि संसाधनों का सहयोग मिल जाए तो वे अपने जीवन की दिशा स्वयं बदल लेते हैं। एमसीबी जिले के मनेन्द्रगढ़ जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत लाई के निवासी सोमारू इसका प्रेरक उदाहरण बनकर सामने आए हैं। पहले दैनिक निस्तारण और खेती के लिए पानी की कमी से जूझने वाला यह परिवार आज मनरेगा के अंतर्गत निर्मित आजीविका डबरी की बदौलत आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर हो रहा है। बाड़ी में सब्जी उत्पादन और डबरी में मछली पालन के माध्यम से उनकी आय में वृद्धि हुई है और सामाजिक जीवन में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिल रहा है।पूर्व की स्थिति : सोमारू पूर्व में वर्षा आधारित परंपरागत धान की खेती पर निर्भर थे। सिंचाई सुविधा के अभाव में अक्सर फसल प्रभावित हो जाती थी और आर्थिक संकट बना रहता था। परिवार की दैनिक आवश्यकताओं के लिए उनकी पत्नी को दूर स्थित हैंडपंप से पानी लाना पड़ता था, जिससे जीवन कठिन था। सीमित रोजगार के अवसरों के कारण परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर बनी हुई थी।

ग्राम सभा में बनी राह : मनरेगा की वार्षिक कार्य योजना के अंतर्गत आयोजित ग्राम सभा में सोमारू ने अपने खेत में आजीविका डबरी निर्माण का प्रस्ताव रखा। ग्राम सभा द्वारा अनुमोदन के पश्चात लगभग तीन लाख रुपये की लागत से डबरी निर्माण की स्वीकृति प्रदान की गई। ग्राम पंचायत द्वारा समयबद्ध रूप से निर्माण कार्य पूर्ण किया गया, जिससे परिवार को स्थायी जल स्रोत उपलब्ध हुआ।

आजीविका डबरी से नई राह : डबरी निर्माण के बाद सोमारू के जीवन में बड़ा बदलाव आया है। अब वे अपने लगभग डेढ़ एकड़ खेत में धान एवं गेहूं की खेती कर रहे हैं तथा बाड़ी में सब्जी उत्पादन भी शुरू कर चुके हैं। हाल ही में उन्होंने लगभग चार हजार रुपये के आलू का विक्रय किया है। साथ ही डबरी में मछली पालन प्रारंभ कर स्वरोजगार का नया माध्यम विकसित किया है, जिससे भविष्य में लगभग एक लाख रुपये तक की अतिरिक्त आय की संभावना है। आजीविका डबरी ने सोमारू के परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के साथ उनके आत्मविश्वास और सामाजिक स्तर में भी उल्लेखनीय वृद्धि की है। यह पहल ग्रामीण आजीविका संवर्धन और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक प्रेरक उदाहरण बनकर उभर रही है।

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