Sunday, February 15, 2026
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सफलता की कहानी: नारी शक्ति की उड़ान: बिहान योजना से आत्मनिर्भर बनी सुखमंती बैगा

एमसीबी, छत्तीसगढ़। ग्राम पंचायत रामगढ़ की निवासी श्रीमती सुखमंती बैगा आज नारी सशक्तिकरण, आत्मनिर्भरता और स्वरोजगार की सशक्त पहचान बन चुकी हैं। छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन “बिहान” से जुड़ने के बाद उनके जीवन में उल्लेखनीय परिवर्तन आया है। पहले जहां परिवार की आय सीमित थी और आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था, वहीं आज वे अपने परिश्रम और योजना से मिले सहयोग के बल पर सम्मानजनक आजीविका अर्जित कर रही हैं। सुखमंती बैगा चंगमाता स्व-सहायता समूह की सक्रिय सदस्य हैं। दिसंबर 2020 में बैंक लिंकेज के माध्यम से उन्हें 50 हजार रुपये का ऋण प्राप्त हुआ। इस राशि से उन्होंने अपने गांव में एक छोटी किराना दुकान शुरू की। शुरुआती दिनों में सीमित संसाधन और अनुभव की कमी जैसी चुनौतियां सामने आईं, लेकिन बिहान योजना के प्रशिक्षण, समूह की सामूहिक शक्ति और अपने आत्मविश्वास से उन्होंने धीरे-धीरे व्यवसाय को मजबूत किया।

आज उनकी किराना दुकान से उन्हें प्रतिमाह लगभग 4 से 7 हजार रुपये तक की नियमित आय हो रही है। इस आय से वे परिवार की रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने के साथ बच्चों की शिक्षा पर ध्यान दे रही हैं और भविष्य के लिए बचत भी कर रही हैं। आर्थिक रूप से मजबूत होने के साथ-साथ उनका आत्मविश्वास भी बढ़ा है और वे सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। सुखमंती बैगा अब अपने गांव की अन्य महिलाओं को भी स्व-सहायता समूह से जुड़कर स्वरोजगार अपनाने और आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं। उनकी यह सफलता कहानी साबित करती है कि सही मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और अवसर मिलने पर ग्रामीण महिलाएं भी आत्मनिर्भर बनकर समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकती हैं और नारी सशक्तिकरण की सशक्त मिसाल बन सकती हैं।

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