एमसीबी, छत्तीसगढ़। खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के अंतर्गत जिला मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर में धान खरीदी ने नया इतिहास रच दिया है। जिले में पारदर्शी, सुव्यवस्थित और पूरी तरह किसान-हितैषी व्यवस्था के तहत 14 जनवरी को कुल 22,736 क्विंटल धान की खरीदी दर्ज की गई है, जो अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक मानी जा रही है। खास बात यह है कि अब तक हुई संपूर्ण खरीदी मोटा धान की श्रेणी में ही दर्ज की गई है, जबकि पतला एवं सरना धान की खरीदी शून्य रही है। यह स्थिति शासन की स्पष्ट नीति, सख्त गुणवत्ता नियंत्रण और प्रभावी निगरानी व्यवस्था का प्रत्यक्ष प्रमाण है, जिससे किसानों और प्रशासन के बीच विश्वास और अधिक मजबूत हुआ है।
जिले के 25 उपार्जन केंद्रों पर किसानों की ऐतिहासिक भागीदारी देखने को मिल रही है। कछोड़ में 108.80 क्विंटल, कमर्जी में 656.00 क्विंटल, केल्हारी में 1022.40 क्विंटल, कोटाडोल में 603.20 क्विंटल, रापा में 204.40 क्विंटल, कटकोना में 963.60 क्विंटल, कोड़ा में 1903.20 क्विंटल और कौड़ीमार में 1156.80 क्विंटल धान की खरीदी हुई है। इसी तरह खड़गवां में 1304.40 क्विंटल, बरदर में 1206.80 क्विंटल, रतनपुर में 740.80 क्विंटल, सिंगहत में 418.40 क्विंटल, कंजिया में 743.20 क्विंटल और कुँवारपुर में 1469.20 क्विंटल धान का उपार्जन दर्ज किया गया है। इसके अतिरिक्त कठौतिया में 729.20 क्विंटल, चैनपुर में 877.20 क्विंटल, बंजी में 796.00 क्विंटल, जनकपुर में 1356.00 क्विंटल, बहरासी में 652.80 क्विंटल, डोडकी में 950.40 क्विंटल, नागपुर में 604.40 क्विंटल, बरबसपुर में 953.20 क्विंटल, माड़ीसरई में 1477.60 क्विंटल तथा सिंगरौली उपार्जन केंद्र में 1080.00 क्विंटल धान की खरीदी की गई है।
धान खरीदी के ये आंकड़े दर्शाते हैं कि शासन की व्यवस्था केवल नीतिगत घोषणाओं तक सीमित नहीं रही, बल्कि जमीनी स्तर पर प्रभावी रूप से लागू हुई है। सुव्यवस्थित टोकन प्रणाली, डिजिटल तौल कांटा, फोटो आधारित सत्यापन, रियल टाइम डेटा एंट्री और समयबद्ध खरीदी प्रक्रिया ने किसानों की वर्षों पुरानी आशंकाओं को दूर किया है। प्रति एकड़ 21 क्विंटल तक खरीदी की नीति और 3100 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य के साथ त्वरित भुगतान व्यवस्था ने किसानों की आर्थिक सुरक्षा को मजबूत किया है। भुगतान सीधे बैंक खातों में पहुंचने से किसानों का शासन-प्रशासन पर भरोसा और अधिक गहराया है। समग्र रूप से खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 जिले के किसानों के लिए भरोसे, सम्मान और आत्मनिर्भरता का नया अध्याय बनकर उभरा है।

