Monday, January 12, 2026
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सफलता की कहानी: भरोसे से आत्मनिर्भरता तक की यात्रा: बदली धान खरीदी व्यवस्था में किसान सुखसेन सिंह की प्रेरक गाथा

एमसीबी। छत्तीसगढ़ में खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 ने किसानों की सोच, भरोसे और भविष्य की दिशा को नई पहचान दी है। यह वर्ष केवल धान विक्रय का समय नहीं रहा, बल्कि यह उस भरोसे का प्रमाण बना है जिसमें किसान निश्चिंत होकर अपनी मेहनत को बाजार तक पहुँचाता है और उसे उसका पूरा सम्मान मिलता है। राज्य सरकार द्वारा लागू की गई पारदर्शी, तकनीक-संपन्न और किसान-केंद्रित धान खरीदी व्यवस्था ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अब किसान की फसल सुरक्षित है और उसका मूल्य बिना किसी बाधा के समय पर सीधे बैंक खाते तक पहुँच रहा है। इसी बदले हुए दौर की सशक्त मिसाल हैं मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के ग्राम पीपरबहरा निवासी किसान सुखसेन सिंह, जिन्होंने खड़गवां उपार्जन केंद्र में धान विक्रय कर इस व्यवस्था की विश्वसनीयता को स्वयं महसूस किया।

खेतों में पसीना और किसानों के मन में भरोसा

किसान सुखसेन सिंह वर्षों से खेती से जुड़े हुए हैं और उन्होंने खेती के हर उतार-चढ़ाव को नजदीक से देखा है। कभी मौसम की मार, कभी लागत का दबाव और कभी बाजार की अनिश्चितता, लेकिन इन सबके बावजूद उन्होंने खेती से अपना रिश्ता कभी कमजोर नहीं होने दिया। इस वर्ष राज्य सरकार की प्रति एकड़ 21 क्विंटल तक धान खरीदी की नीति और 3100 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य ने उनके मन में स्थिरता और सुरक्षा का भाव भर दिया। यह केवल एक आर्थिक निर्णय नहीं था, बल्कि यह उस भरोसे का प्रतीक बना जिसमें किसान को यह एहसास हुआ कि सरकार उसकी मेहनत को समझती है और उसके साथ खड़ी है।

खड़गवां उपार्जन केंद्र पर दिखा व्यवस्था का नया चेहरा

तुहर टोकन 24ग7 व्यवस्था के अंतर्गत निर्धारित तिथि पर टोकन प्राप्त कर जब किसान सुखसेन सिंह खड़गवां उपार्जन केंद्र पहुँचे, तो उन्हें एक पूरी तरह बदला हुआ माहौल देखने को मिला। सुव्यवस्थित परिसर, बैठने की बेहतर व्यवस्था, स्वच्छ पेयजल और कर्मचारियों का सहयोगी व्यवहार यह दर्शा रहा था कि अब धान खरीदी प्रक्रिया में किसान की सुविधा और सम्मान को केंद्र में रखा गया है। न भीड़ थी, न अफरा-तफरी और न ही अनावश्यक इंतजार, जिससे किसान पूरी प्रक्रिया के दौरान आत्मविश्वास और संतोष से भरे नजर आए।

नए तकनीक ने बढ़ाया विश्वास

धान खरीदी के दौरान डिजिटल तौल कांटे, फोटो आधारित सत्यापन और रियल टाइम डेटा एंट्री जैसी आधुनिक तकनीकों ने पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और भरोसेमंद बना दिया। प्रत्येक चरण किसान की उपस्थिति में संपन्न हुआ, जिससे किसी भी प्रकार की शंका या भ्रम की कोई गुंजाइश नहीं रही। तकनीक के इस सहज और प्रभावी उपयोग ने न केवल समय की बचत की, बल्कि किसानों के मन में व्यवस्था के प्रति विश्वास को और मजबूत किया।

सौ क्विंटल धान और आत्मविश्वास की नई ऊंचाई

खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में किसान सुखसेन सिंह ने कुल 100 क्विंटल धान का सफलतापूर्वक विक्रय किया। पूरी खरीदी प्रक्रिया समयबद्ध और व्यवस्थित रही। जब उनकी मेहनत की फसल सम्मानजनक और पारदर्शी तरीके से बिकी, तो उनके चेहरे पर संतोष और गर्व साफ झलक रहा था। यह दृश्य बदली हुई धान खरीदी व्यवस्था की सफलता का सजीव प्रमाण बन गया।

समय पर भुगतान से बदली योजनाएँ

धान विक्रय के पश्चात भुगतान राशि सीधे किसान सुखसेन सिंह के बैंक खाते में जमा हुई, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति और अधिक सुदृढ़ हुई है। समय पर भुगतान मिलने से अब वे बच्चों की शिक्षा, पारिवारिक जरूरतों और आगामी कृषि सत्र की तैयारी को लेकर अधिक आत्मविश्वास के साथ आगे की योजना बना पा रहे हैं। यह व्यवस्था किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम के रूप में उभरी है।

किसान हितैषी नीतियों पर भरोसा

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में लागू की गई किसान हितैषी नीतियों के प्रति किसान सुखसेन सिंह ने संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि बदली हुई धान खरीदी व्यवस्था ने किसानों के मनोबल को नई ऊंचाई दी है। उनके अनुसार अब खेती केवल संघर्ष नहीं, बल्कि एक सुरक्षित, सम्मानजनक और स्थायी आजीविका बनती जा रही है।

एक किसान की कहानी, हजारों की आवाज

किसान सुखसेन सिंह की यह सफलता की कहानी छत्तीसगढ़ के उन हजारों किसानों की भावना को प्रतिबिंबित करती है, जो नई धान खरीदी व्यवस्था से लाभान्वित होकर आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहे हैं। यह कहानी इस बात का प्रमाण है कि जब नीति सही हो, तकनीक पारदर्शी हो और प्रशासन संवेदनशील हो, तो किसान के जीवन में वास्तविक और सकारात्मक बदलाव संभव है।

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