एमसीबी। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा धान खरीदी व्यवस्था को अधिक सरल, पारदर्शी और किसान-हितैषी बनाने के उद्देश्य से लागू की गई “24×7 टोकन – तुहर द्वार” पहल खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में किसानों के लिए एक ऐतिहासिक राहत बनकर सामने आई है। यह नवाचार न केवल तकनीक आधारित है, बल्कि किसानों की समय, सुविधा और सम्मान-तीनों को केंद्र में रखकर विकसित किया गया एक भरोसेमंद मॉडल है, जिसे जिले भर में किसानों की तेजी से स्वीकृति मिल रही है। इस पहल के अंतर्गत किसानों को 24 घंटे, सप्ताह के सातों दिन अपनी सुविधा के अनुसार डिजिटल टोकन उपलब्ध कराया जा रहा है। “तुहर द्वार” की अवधारणा ने टोकन प्रक्रिया को गांव और घर के समीप पहुंचा दिया है, जिससे अब किसानों को समितियों, उपार्जन केंद्रों या कार्यालयों के अनावश्यक चक्कर नहीं लगाने पड़ते हैं। इससे न केवल समय और संसाधनों की बचत हो रही है, बल्कि धान खरीदी प्रक्रिया तनाव-मुक्त और सम्मानजनक बन गई है।
टोकन से लेकर तौल तक-हर कदम पारदर्शी और अनुशासित
डिजिटल टोकन प्राप्त होते ही किसान को यह स्पष्ट सूचना मिल जाती है कि उसे किस तिथि, किस समय और किस उपार्जन केंद्र पर धान लेकर पहुंचना है। इससे उपार्जन केंद्रों में भीड़ का दबाव नियंत्रित हो रहा है, तौल कार्य सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न हो रहा है और पूरी प्रक्रिया में अनुशासन व पारदर्शिता सुनिश्चित हो रही है। इसके साथ ही डिजिटल तौल, फोटो सत्यापन और सीधे बैंक खाते में भुगतान जैसी सुविधाओं ने किसानों का भरोसा और मजबूत किया है। किसानों का कहना है कि “27×7 टोकन – तुहर द्वार” ने धान खरीदी को सरल, तेज और भरोसेमंद बना दिया है।
‘तुहर द्वार’ का भावार्थ और 24×7 की अवधारणा
छत्तीसगढ़ी भाषा में “तुहर द्वार (Tumhar Dwar)” का अर्थ है- “आपके द्वार पर” या “आपकी सुविधा के लिए”। 24×7 टोकन का आशय है कि यह सुविधा दिन-रात, सप्ताह के सभी दिनों किसानों के लिए उपलब्ध रहती है, जिससे किसान अपनी आवश्यकता और समय के अनुसार टोकन प्राप्त कर सकें।
प्रणाली का कार्य-विधान
किसान अपने 4-अंकीय पिन से ऐप में लॉग-इन करते हैं और “टोकन के लिए आवेदन करें” विकल्प का चयन करते हैं। इसके पश्चात आगामी 7 दिनों में से अपनी पसंदीदा तिथि और धान की मात्रा (क्विंटल में) दर्ज करते हैं। “सुरक्षित करें” पर क्लिक करते ही टोकन और स्लॉट सुनिश्चित हो जाता है।
सुशासन और तकनीक का प्रभावी समन्वय
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में शुरू की गई यह पहल सुशासन, नवाचार और तकनीक के प्रभावी समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण है। “24×7 टोकन – तुहर द्वार” ने छत्तीसगढ़ को किसान-अनुकूल प्रशासन की दिशा में एक नई और सशक्त पहचान दी है। यह व्यवस्था न केवल वर्तमान में किसानों की सुविधा बढ़ा रही है, बल्कि भविष्य की स्मार्ट और पारदर्शी कृषि विपणन प्रणाली की मजबूत नींव भी रख रही है।

