एमसीबी, छत्तीसगढ़। किसी भी सशक्त और समतामूलक समाज की नींव महिलाओं और बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा से ही मजबूत होती है। इसी उद्देश्य को केंद्र में रखते हुए महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा “बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ” योजना के अंतर्गत ग्राम लालपुर में बाल अधिकारों पर केंद्रित एक व्यापक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह आयोजन जिला कार्यक्रम अधिकारी के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। कार्यक्रम के दौरान लिंग आधारित हिंसा जैसे गंभीर सामाजिक विषय पर संवाद स्थापित किया गया। वक्ताओं ने इसके कारणों, स्वरूपों एवं दूरगामी दुष्परिणामों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह हिंसा केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना से जुड़ा प्रश्न है। इसे समाप्त करने के लिए परिवार, समुदाय और संस्थाओं की सामूहिक भूमिका को रेखांकित किया गया।
इस अवसर पर महिलाओं एवं बालिकाओं को प्राप्त कानूनी संरक्षण एवं विशेष अधिकारों की जानकारी दी गई, जिससे वे आत्मनिर्भर बनकर अपने अधिकारों के लिए सजग रह सकें। बालिकाओं की शिक्षा, सुरक्षा और सम्मान को समाज की साझा जिम्मेदारी बताया गया। कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण आयाम बाल विवाह उन्मूलन रहा। उपस्थितजनों को बाल विवाह के विरुद्ध शपथ दिलाई गई तथा इसके स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक विकास पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों पर गंभीर विमर्श हुआ। बाल विवाह मुक्त समाज के निर्माण को समय की अनिवार्यता बताया गया।
इसके अतिरिक्त महिला एवं बाल विकास विभाग की विभिन्न योजनाओं-बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, महिला हेल्पलाइन 181, सखी वन स्टॉप सेंटर, सखी निवास, घरेलू हिंसा अधिनियम, पोक्सो अधिनियम तथा चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 की जानकारी साझा की गई, ताकि जरूरतमंद महिलाएं एवं बच्चे त्वरित सहायता प्राप्त कर सकें। यह कार्यक्रम केवल जागरूकता का मंच नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन की सामूहिक प्रतिबद्धता का प्रतीक बनकर उभरा, जिसने एक सुरक्षित, समान और सशक्त भविष्य की दिशा को स्पष्ट किया।

