एमसीबी, छत्तीसगढ़। जनकपुर उपार्जन केंद्र में इस वर्ष खरीफ विपणन 2025-26 की खरीदी व्यवस्था किसानों के लिए उम्मीद और विश्वास की नई किरण लेकर आई है। यही सकारात्मक बदलाव आज भगवानपुर के किसान उमेश कुमार सिंह के परिवार में एक प्रेरक सफलता की कहानी बन गया। उमेश सिंह स्वयं मंडी नहीं पहुँच सके, लेकिन उनकी जगह उनके पुत्र अंकुर सिंह, जो पंजीयन में नामित प्रतिनिधि हैं, 250 क्विंटल धान लेकर उपार्जन केंद्र पहुँचे। पहली बार बिना किसी भागदौड़, बिना किसी परेशानी और पूरी पारदर्शिता के साथ उन्होंने खरीदी प्रक्रिया पूरी की। अंकुर ने मुस्कुराते हुए कहा कि इस बार सब कुछ समय पर और ईमानदारी से हो रहा है। मंडी में सम्मान महसूस हुआ।
इस सफलता के पीछे पांच मुख्य कारण– स्वच्छ और सुव्यवस्थित उपार्जन केंद्र, पर्याप्त बारदाना, पानी और बैठने की व्यवस्था, डिजिटल टोकन और पारदर्शी तौल प्रणाली, 3100 रुपए प्रति क्विंटल का रिकॉर्ड समर्थन मूल्य, सरकार और प्रशासन का संवेदनशील व सक्रिय प्रबंधन। अंकुर बताते हैं कि इस वर्ष की व्यवस्था ने किसानों के मन में भरोसा पैदा किया है। जहाँ पहले इंतज़ार और अव्यवस्था की शिकायतें थीं, वहीं अब तेज, समयबद्ध और सम्मानजनक खरीदी किसानों के चेहरों पर खुशी ला रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और जिला प्रशासन के प्रति आभार जताते हुए कहा कि आज पहली बार लगा कि सरकार सचमुच किसानों के साथ है।
विश्वास की नई शुरुआत
जनकपुर उपार्जन केंद्र की यह सफलता केवल धान खरीदी तक सीमित नहीं है- यह किसानों के आत्मविश्वास, सम्मान और आर्थिक स्थिरता की कहानी है। छत्तीसगढ़ में यह खरीदी व्यवस्था साबित कर रही है कि किसान केवल उत्पादक नहीं, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था और सम्मान की मजबूत नींव हैं।

