Monday, January 12, 2026
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एमसीबी में पीएम-आशा योजना लागू, दलहन-तिलहन उपार्जन से किसानों को मिलेगा MSP का पूरा लाभ

एमसीबी, छत्तीसगढ़। प्रधानमंत्री-अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (पीएम-आशा) के अंतर्गत दलहन एवं तिलहन आत्मनिर्भरता मिशन का शुभारंभ किया गया है। इस योजना का उद्देश्य किसानों की आय में वृद्धि करते हुए राज्य में दलहन उत्पादन को बढ़ावा देना तथा उन्हें न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर सुरक्षित खरीद की गारंटी प्रदान करना है। योजना के तहत अरहर, उड़द और मसूर का 100 प्रतिशत उपार्जन किया जाएगा, जबकि मूंगफली, सोयाबीन, मूंग, चना और सरसों का राज्य के उत्पादन का 25 प्रतिशत उपार्जन केंद्र सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त एजेंसियों-प्रोसेसिंग यूनिट्स, नाफेड एवं एनसीसीएफ-के माध्यम से किया जाएगा।

किसानों की आर्थिक सुरक्षा में बड़ा कदम– उप संचालक कृषि, जिला एमसीबी ने बताया कि सरकार का लक्ष्य केवल दलहन उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य सुनिश्चित करना भी है। किसानों की फसल का समय पर उपार्जन तथा उन्हें पूरा मूल्य उपलब्ध कराने हेतु प्रधानमंत्री-अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (पीएम-आशा) एक क्रांतिकारी कदम सिद्ध हो रहा है।

जिले में दो उपार्जन केंद्र स्वीकृत– जिला एमसीबी में योजना के तहत दो उपार्जन केंद्र स्वीकृत किए गए हैं। आदिम जाति सेवा सहकारी समिति, चैनपुर (वि.ख. मनेंद्रगढ़-खड़गवां), आदिम जाति सेवा सहकारी समिति, जनकपुर (वि.ख. भरतपुर) योजनांतर्गत उपार्जन के लिए किसानों को एकीकृत किसान पोर्टल में अनिवार्य रूप से पंजीयन कराना होगा। पंजीयन की समय सीमा-खरीफ फसलें 1 दिसंबर से 28 फरवरी, रबी फसलें 15 फरवरी से 15 मई तक। किसान पंजीयन के दौरान अपनी सुविधा के अनुसार उपार्जन केंद्र का चयन कर सकेंगे।

90 दिन की उपार्जन अवधि– योजना में अधिसूचित फसलों की उपार्जन अवधि 90 दिन निर्धारित की गई है। इस अवधि में किसान अपनी उपज को MSP पर बेच सकते हैं। साथ ही, प्रोत्साहन मूल्य तंत्र के माध्यम से बाजार मूल्य से अधिक लाभ प्राप्त करने की भी संभावना रहती है, जिससे किसानों की आय में अतिरिक्त वृद्धि हो सकती है।

फसल विविधीकरण और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा– उप संचालक कृषि ने कहा कि यह योजना किसानों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने के साथ-साथ जिले में फसल विविधीकरण के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करती है। दलहन उत्पादन बढ़ने से प्रदेश और देश दोनों के लिए आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति होगी।

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