Tuesday, March 3, 2026
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बाबा बच्छराज कुंवर धाम में आस्था, परंपरा और जनजातीय अस्मिता का महाआलय, बैगाओं का ऐतिहासिक संघर्ष बना न्याय की मिसाल-ट्रस्ट निर्माण असंवैधानिक घोषित

बलरामपुर, छत्तीसगढ़! जिले के ऐतिहासिक और आस्था से परिपूर्ण स्थल बाबा बच्छराज कुंवर धाम में आयोजित तीन दिवसीय भव्य आयोजन के तीसरे एवं अंतिम दिवस पर कार्यक्रम का समापन गरिमामय वातावरण में हुआ। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित होकर अतिथियों ने बैगा पुजारी, गायता, भूमका एवं अन्य दैवीय आस्था स्थलों का आशीर्वाद ग्रहण किया। संपूर्ण परिसर श्रद्धा और सांस्कृतिक उल्लास से गूंज उठा, जहां पारंपरिक विधि-विधान से पूजा-अर्चना संपन्न हुई और जनजातीय आस्था की गहराई का अनूठा दर्शन हुआ।

आदिवासी परंपराओं की संवैधानिक विजय

गौरतलब है कि बाबा बच्छराज कुंवर धाम के बैगाओं ने छत्तीसगढ़ के अनुसूचित क्षेत्रों में ट्रस्ट निर्माण के विरुद्ध वर्षों तक संघर्ष किया था। यह संघर्ष केवल एक धार्मिक आस्था की रक्षा नहीं, बल्कि संविधान की आत्मा में निहित जनजातीय स्वशासन की भावना की रक्षा का प्रतीक था। रोड से कोर्ट तक चले इस जन आंदोलन का परिणाम आज सभी आदिवासी समाज के लिए गौरव का विषय है, क्योंकि माननीय छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट कर दिया कि “अनुसूचित क्षेत्रों के आदिवासी आस्था स्थलों में ट्रस्ट निर्माण असंवैधानिक है।” इस ऐतिहासिक निर्णय ने न केवल बैगाओं के त्याग और संघर्ष को अमर कर दिया, बल्कि संविधान के पांचवीं अनुसूची क्षेत्र के अधिकारों को भी सशक्त किया।

संघर्ष के पथप्रदर्शक और प्रेरणा स्रोत

इस आंदोलन को दिशा देने में डाॅं. नारवेन टेकाम जैसे विद्वानों का मार्गदर्शन मील का पत्थर साबित हुआ। उन्होंने बैगा समाज को न केवल अपने अधिकारों के प्रति जागरूक किया, बल्कि संवैधानिक रूप से न्याय प्राप्त करने का साहस भी दिया। यह आंदोलन अब एक मिसाल बन गया है—जहां परंपरा और संविधान दोनों ने मिलकर आदिवासी स्वाभिमान की रक्षा की।

केराम कमांडो सरगुजा की निर्णायक भूमिका

इस जनांदोलन में “केराम कमांडो सरगुजा” की भूमिका भी उल्लेखनीय रही। आवेदन, निवेदन और जन समर्थन के बाद जब प्रशासनिक स्तर पर निर्णय की प्रक्रिया शुरू हुई, तब इस दल ने दनादन परिपालन सुनिश्चित कराया। उनका उद्देश्य केवल न्याय प्राप्त करना नहीं, बल्कि जनजातीय आस्था को सम्मानित कराना था, जो अंततः सफल रहा।

गोंगपा टीम का श्रद्धा व एकता का संदेश

इस अवसर पर गोंडवाना गणतंत्र पार्टी (गोंगपा) के वरिष्ठ नेता एवं पदाधिकारी भी बाबा बच्छराज कुंवर धाम पहुंचे। टीम में श्री कुमेश्वर सिंह पोया (जिलाध्यक्ष गोंगपा सूरजपुर), श्री संजय पोया (मीडिया प्रभारी गोंगपा सूरजपुर), श्री रितेश टेकाम (ब्लॉक सचिव गोंगपा सूरजपुर) सहित सैकड़ों कार्यकर्ता उपस्थित रहे। सभी ने सामूहिक रूप से आदिवासी अस्मिता, एकता और आस्था के इस महोत्सव में भाग लेकर यह संदेश दिया कि आदिवासी समाज अपनी परंपराओं की रक्षा के लिए सदैव एकजुट है।

आस्था, संघर्ष और स्वाभिमान का संगम स्थल — बाबा बच्छराज कुंवर धाम

बलरामपुर का यह धाम अब केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि आदिवासी अस्मिता, संवैधानिक अधिकार और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक बन चुका है। यहां की मिट्टी में संघर्ष की गाथाएं हैं, और आस्था की ज्योति आज भी जल रही है — जो आने वाली पीढ़ियों को यह संदेश देती है कि जब आस्था संविधान से जुड़ती है, तो इतिहास नया अध्याय लिखता है।

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