लेखक :विजय शंकर नायक, वरिष्ठ नेता ,झारखण्ड कांग्रेस
यह बजट केवल आंकड़ा नहीं—यह विश्वास है, यह संकल्प है, और यह झारखंड के उज्ज्वल भविष्य की ठोस आधारशिला है*। झारखंड विधानसभा में वित्त वर्ष 2026–27 के लिए ₹1,58,560 करोड़ का बजट प्रस्तुत करते हुए वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि झारखंड की सरकार चुनौतियों से घबराने वाली नहीं है। यह बजट केवल आय-व्यय का वार्षिक दस्तावेज नहीं, बल्कि राजनीतिक इच्छाशक्ति, आर्थिक प्रबंधन और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों का समन्वित घोषणापत्र है।बजट भाषण की शुरुआत वीर शहीदों और झारखंड आंदोलन के महानायक शिबू सोरेन को श्रद्धांजलि देकर की गई। यह संकेत था कि यह सरकार विकास को केवल आर्थिक दृष्टि से नहीं, बल्कि ऐतिहासिक और सामाजिक चेतना के साथ जोड़कर देखती है*।
1. बजट का आकार: निरंतर वृद्धि का प्रमाण
₹1,58,560 करोड़ का यह बजट राज्य की वित्तीय क्षमता और प्रशासनिक दक्षता का प्रमाण है। पिछले वर्षों में बजट आकार में क्रमिक वृद्धि हुई है, जो बताती है कि:-राज्य का आंतरिक राजस्व संग्रह बढ़ा है | खनिज संसाधनों से आय में सुधार हुआ है, कर प्रशासन में पारदर्शिता आई है| पूंजीगत व्यय को प्राथमिकता दी गई है | इतने बड़े बजट का अर्थ है कि सरकार विकास की गति को धीमा नहीं, बल्कि तेज करना चाहती है।जब संसाधनों पर दबाव हो, संघीय सहयोग में असंतुलन हो और आर्थिक चुनौतियाँ सामने हों, तब नेतृत्व की असली परीक्षा होती है। वित्त वर्ष 2026–27 के लिए प्रस्तुत ₹1,58,560 करोड़ का झारखंड बजट इसी परीक्षा में खरा उतरने का दस्तावेज़ है। यह बजट केवल आय-व्यय का लेखा-जोखा नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता, सामाजिक न्याय और जनभागीदारी के संकल्प का सशक्त घोषणापत्र है — जो बताता है कि चुनौतियाँ चाहे जितनी हों, विकास की रफ्तार नहीं थमेगी।केंद्र से ₹5,000 करोड़ की लंबित हिस्सेदारी और जीएसटी से अनुमानित ₹5,640 करोड़ के नुकसान के बावजूद सामाजिक न्याय, पूंजीगत निवेश और ‘बाल बजट’ जैसी ऐतिहासिक पहलों के साथ राज्य ने विकास की रफ्तार को दी नई मजबूती।
2. केंद्र से लंबित राशि और वित्तीय असंतुलन
वित्त मंत्री ने सदन में तथ्यों के साथ कहा कि:- केंद्र सरकार से कर हिस्सेदारी में लगभग ₹5,000 करोड़ लंबित हैं। जीएसटी व्यवस्था के कारण राज्य को अनुमानित ₹5,640 करोड़ का नुकसान हो रहा है। मनरेगा की राशि वितरण प्रणाली में बदलाव से ₹5,640 करोड़ तक की संभावित कमी का आकलन है। यह आँकड़े बताते हैं कि संघीय ढांचे में वित्तीय संतुलन की चुनौती वास्तविक है। परंतु महत्वपूर्ण यह है कि इन परिस्थितियों के बावजूद सरकार ने विकास योजनाओं में कोई कटौती नहीं की।
3. सामाजिक क्षेत्र पर बड़ा निवेश
(क) शिक्षा- विद्यालय भवनों के निर्माण और मरम्मत के लिए विशेष प्रावधान, डिजिटल कक्षाओं का विस्तार, छात्रवृत्ति योजनाओं में वृद्धि, शिक्षक नियुक्तियों को गति, सरकार समझती है कि मानव संसाधन में निवेश दीर्घकालीन आर्थिक विकास की कुंजी है।
(ख) स्वास्थ्य- जिला अस्पतालों का उन्नयन, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में चिकित्सक और उपकरण उपलब्ध कराना, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य कार्यक्रमों का विस्तार, कुपोषण उन्मूलन के लिए समेकित पोषण अभियान
(ग) “बाल बजट” की अभिनव पहल- राज्य के विभिन्न जिलों में “बाल बजट संवाद” आयोजित किए गए। बच्चों से पूछा गया कि वे स्कूल, खेल, पोषण और सुरक्षा के क्षेत्र में क्या चाहते हैं। यह पहल लोकतांत्रिक भागीदारी का अनूठा उदाहरण है।
4. ग्रामीण विकास और रोजगार- (क) मनरेगा और ग्रामीण रोजगार- हालांकि मनरेगा के फंड आवंटन को लेकर चुनौतियाँ हैं, पर राज्य सरकार ने स्पष्ट किया कि:- ग्रामीण रोजगार योजनाओं को प्राथमिकता दी जाएगी, राज्य संसाधनों से पूरक वित्त उपलब्ध कराया जाएगा |
(ख) कृषि और किसान- सिंचाई परियोजनाओं के पुनर्जीवन, फसल विविधीकरण, कृषि प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना, न्यूनतम समर्थन मूल्य तंत्र को सुदृढ़ करना
(ग) स्वयं सहायता समूह (SHGs)- महिला समूहों को सस्ती दर पर ऋण और विपणन सहायता उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है।
5. अवसंरचना: दीर्घकालिक आर्थिक आधार- ग्रामीण और शहरी सड़कों का विस्तार, पुल और फ्लाईओवर निर्माण, ऊर्जा वितरण प्रणाली में सुधार,औद्योगिक क्लस्टर और लॉजिस्टिक पार्क की स्थापना,पूंजीगत व्यय में वृद्धि का सीधा प्रभाव रोजगार सृजन और निजी निवेश आकर्षण पर पड़ता है।
6. खनिज संपदा और राजस्व सुदृढ़ीकरण- झारखंड खनिज संसाधनों से समृद्ध राज्य है। ई-नीलामी प्रणाली से पारदर्शिता, रॉयल्टी संग्रह में वृद्धि, अवैध खनन पर नियंत्रण, खनन क्षेत्र से प्राप्त आय को सामाजिक क्षेत्र और अवसंरचना में पुनर्निवेश करना सरकार की रणनीति है।
7. युवाओं के लिए अवसर- कौशल विकास मिशन, स्टार्टअप नीति, MSME प्रोत्साहन, आईटी और सेवा क्षेत्र में निवेश, युवा आबादी को रोजगार और उद्यमिता से जोड़ना सरकार का दीर्घकालिक लक्ष्य है।
8. शहरी विकास- नगर निकायों को वित्तीय सुदृढ़ता, पेयजल और स्वच्छता परियोजनाएँ, स्मार्ट प्रबंधन प्रणाली, आवास योजनाओं का विस्तार, शहरीकरण की बढ़ती गति को ध्यान में रखते हुए बजट में संतुलित दृष्टिकोण अपनाया गया है।
9. वित्तीय अनुशासन और पारदर्शिता- डिजिटल ट्रेजरी प्रणाली, ई-गवर्नेंस, ऑनलाइन भुगतान प्रणाली, बजट मॉनिटरिंग डैशबोर्ड, इन उपायों से भ्रष्टाचार पर अंकुश और राजस्व की बेहतर निगरानी संभव हुई है।
10. आत्मनिर्भरता का संकल्प – वित्त मंत्री ने स्पष्ट कहा कि यदि केंद्र सहयोग नहीं करता, तो भी राज्य अपने आंतरिक संसाधनों के माध्यम से विकास की गति बनाए रखेगा। ₹5,000 करोड़ की लंबित राशि और ₹5,640 करोड़ के जीएसटी नुकसान के बावजूद योजनाओं में कटौती न करना प्रशासनिक आत्मविश्वास का प्रमाण है।
11. राजनीतिक स्थिरता और विकास- गठबंधन सरकार ने स्पष्ट किया है कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद विकास सर्वोच्च प्राथमिकता है। राज्यपाल के अभिभाषण का उल्लेख करते हुए यह स्वीकार किया गया कि केंद्र का सहयोग आवश्यक है, परंतु राज्य की जिम्मेदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
निष्कर्ष: संघर्ष से सशक्त भविष्य की ओर
₹1,58,560 करोड़ का यह बजट झारखंड की विकास गाथा का नया अध्याय है। सामाजिक न्याय, वित्तीय अनुशासन, पूंजीगत निवेश, ग्रामीण और शहरी संतुलन, बच्चों और युवाओं पर विशेष ध्यान, इन सभी पहलुओं का समन्वय इस बजट को दूरदर्शी बनाता है। केंद्र से अपेक्षित ₹5,000 करोड़ की लंबित राशि और जीएसटी से ₹5,640 करोड़ के अनुमानित नुकसान के बावजूद विकास की गति बनाए रखना इस सरकार की प्रशासनिक क्षमता और राजनीतिक प्रतिबद्धता का प्रमाण है। झारखंड आज संसाधनों की धरती से आगे बढ़कर अवसरों की धरती बनने की दिशा में अग्रसर है। यदि यही नीति, पारदर्शिता और समावेशी दृष्टिकोण जारी रहा, तो आने वाले वर्षों में झारखंड केवल खनिज संपदा के लिए नहीं, बल्कि मानव विकास सूचकांकों और आर्थिक प्रगति के लिए भी देश के अग्रणी राज्यों में शामिल होगा। यह बजट केवल आंकड़ा नहीं—यह विश्वास है, यह संकल्प है, और यह झारखंड के उज्ज्वल भविष्य की ठोस आधारशिला है ।

