कोरबा, छत्तीसगढ़। सरकारी अस्पतालों में त्वरित और नि:शुल्क उपचार के दावे एक बार फिर सवालों के घेरे में हैं। जिला चिकित्सालय कोरबा में भर्ती 45 वर्षीय महिला छतबाई दास पिछले एक सप्ताह से असहनीय पीड़ा झेल रही है, लेकिन आवश्यक ऑपरेशन अब तक नहीं हो सका। मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था की संवेदनशीलता और जवाबदेही पर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं।
जिले के ग्राम कुमगरी निवासी छतबाई, पति परदेशी दास, बीते एक माह से पेट दर्द से परेशान थीं। स्थानीय स्तर पर इलाज के बाद भी राहत नहीं मिली तो परिजन उन्हें शहर के एक निजी अस्पताल लेकर गए। जांच में सामने आया कि महिला की बच्चेदानी में बड़ा गठान (ट्यूमर) है, जो कभी भी फट सकता है और जानलेवा साबित हो सकता है। डॉक्टरों ने तत्काल ऑपरेशन की सलाह दी और लगभग 35 से 40 हजार रुपये खर्च बताया। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार इतनी बड़ी राशि की व्यवस्था नहीं कर सका, जिसके बाद 16 फरवरी को महिला को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया।
परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में भर्ती के बाद से उन्हें लगातार जांच के नाम पर इधर-उधर दौड़ाया जा रहा है। पहले खून की कमी बताकर रक्त की व्यवस्था करने को कहा गया। पर्याप्त रक्त चढ़ाने के बाद भी कभी पेशाब जांच, कभी आंतरिक जांच तो कभी अन्य परीक्षणों के नाम पर समय बीतता रहा, लेकिन ऑपरेशन की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इस बीच महिला की हालत लगातार बिगड़ती जा रही है और वह असहनीय दर्द से कराह रही है।
मामले की जानकारी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी सूर्यनारायण केसरी को भी दी जा चुकी है, बावजूद इसके उपचार में तेजी नहीं आई। चिकित्सकों का कहना है कि ऑपरेशन में लगभग एक माह का समय लग सकता है, जबकि निजी अस्पताल में इसे तत्काल आवश्यक बताया गया था। परिजन इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं।
परिवार का कहना है कि शासन द्वारा हर मरीज को शासकीय अस्पताल में समुचित और समय पर उपचार का अधिकार दिया गया है, लेकिन जमीनी स्तर पर व्यवस्था इसके उलट नजर आ रही है। एक सप्ताह से अस्पताल के चक्कर काटते-काटते वे थक चुके हैं। अब उन्होंने कलेक्टर से गुहार लगाई है कि मामले में संज्ञान लेकर स्वास्थ्य विभाग को तत्काल आवश्यक उपचार के निर्देश दिए जाएं, ताकि पीड़िता की जान बचाई जा सके।

