एमसीबी, छत्तीसगढ़। जिले में जनगणना 2027 की तैयारियों को लेकर कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में दो दिवसीय प्रशिक्षण का प्रथम सत्र आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कलेक्टर डी. राहुल वेंकट, जिला पंचायत सीईओ अंकिता सोम शर्मा, अपर कलेक्टर अनिल कुमार सिदार और श्रीमती नम्रता डोंगरे ने की। रायपुर से आए सहायक निदेशक मनोज महिलांगे और बलवंत सोमकुवर ने अधिकारियों और कर्मचारियों को विस्तार से समझाया कि 2027 की जनगणना पहले की तुलना में बिल्कुल अलग और पूरी तरह डिजिटल होगी। इसका मतलब यह है कि इस बार कागज पर नहीं, बल्कि मोबाइल एप और डिजिटल उपकरणों से घर-घर की जानकारी दर्ज की जाएगी।
प्रशिक्षण में सहायक निदेशक मनोज महिलांगे ने बताया कि जनगणना का पहला चरण मकान सूचीकरण होगा। उदाहरण के तौर पर यदि किसी गांव में 300 घर हैं तो सबसे पहले हर घर की गिनती और पहचान की जाएगी। जैसे रामलाल का पक्का मकान है जिसमें दो कमरे और एक रसोई है, तो उस मकान को एक यूनिक नंबर दिया जाएगा और मोबाइल एप में उसकी जानकारी दर्ज होगी। यदि किसी मकान में दो परिवार रहते हैं, जैसे नीचे माता-पिता और ऊपर बेटे का अलग परिवार, तो दोनों को अलग-अलग परिवार के रूप में दर्ज किया जाएगा। इससे यह स्पष्ट होगा कि गांव में कितने मकान हैं और कितने परिवार।
एमसीबी जिले का जनगणना कोड 001 निर्धारित किया गया है। प्रशिक्षण में बताया गया कि हर गांव को हाउस लिस्टिंग ब्लॉक यानी HLB में बांटा जाएगा। उदाहरण के तौर पर यदि किसी गांव की आबादी 1500 है तो उसे दो या तीन HLB में बांटा जा सकता है, क्योंकि एक HLB में लगभग 600 से 800 लोगों की आबादी रखी जाएगी। ध्यान रखा जाएगा कि कोई भी HLB पंचायत, नगर या जिले की सीमा को पार न करे। यानी यदि एक गांव एक पंचायत में आता है तो उसकी गणना उसी सीमा में होगी, दूसरे पंचायत की सीमा में नहीं जाएगी।
जनगणना 2027 में कुल 33 प्रश्न पूछे जाएंगे। उदाहरण के तौर पर परिवार के मुखिया का नाम, घर में रहने वाले सदस्यों की संख्या, उनकी उम्र, पढ़ाई का स्तर, रोजगार की स्थिति, घर की बनावट, पीने के पानी का स्रोत, बिजली की उपलब्धता, खाना बनाने के ईंधन का प्रकार जैसी जानकारी ली जाएगी। यदि किसी परिवार में पांच सदस्य हैं और उनमें से दो पढ़ाई कर रहे हैं, एक किसान है और एक मजदूरी करता है, तो यह जानकारी मोबाइल एप में तुरंत दर्ज होगी।
प्रशिक्षण में यह भी बताया गया कि इस बार स्व-गणना की सुविधा भी रहेगी। उदाहरण के तौर पर यदि कोई शिक्षित परिवार स्वयं मोबाइल या ऑनलाइन माध्यम से अपनी जानकारी भरना चाहता है तो वह निर्धारित पोर्टल पर जाकर जानकारी दर्ज कर सकेगा। इसके बाद प्रगणक उस जानकारी का सत्यापन करेगा। इससे समय की बचत होगी और पारदर्शिता बढ़ेगी।
डिजिटल प्रणाली के अंतर्गत सीएमएमएस पोर्टल और एचएलओ मोबाइल उपकरणों का उपयोग किया जाएगा। उदाहरण के लिए, यदि किसी गांव में प्रगणक ने 100 घरों का डेटा दर्ज किया है तो जिला स्तर के अधिकारी तुरंत पोर्टल पर देखकर जान सकेंगे कि कितने घरों की गणना हो चुकी है और कितने शेष हैं। यदि कहीं गलती या अधूरी जानकारी दिखती है तो तुरंत सुधार के निर्देश दिए जा सकेंगे। इसके लिए जनगणना फीडबैक मॉनिटरिंग सिस्टम यानी CFMS का उपयोग किया जाएगा, जिससे हर स्तर पर निगरानी होगी।
कानूनी प्रावधानों की भी जानकारी दी गई। जनगणना अधिनियम 1948 के तहत केंद्र सरकार द्वारा जनगणना कराई जाती है। धारा 8 के अनुसार नागरिकों को पूछे गए प्रश्नों का सही उत्तर देना अनिवार्य है। उदाहरण के तौर पर यदि कोई व्यक्ति अपनी सही उम्र या परिवार के सदस्यों की संख्या छिपाता है तो यह कानून के खिलाफ होगा। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि दी गई जानकारी पूरी तरह गोपनीय रखी जाती है और इसका उपयोग केवल सरकारी आंकड़ों और योजनाओं के लिए होता है, किसी कर या जांच के लिए नहीं।
प्रशिक्षण में प्रगणक और पर्यवेक्षक की भूमिका भी समझाई गई। उदाहरण के तौर पर गांव का शिक्षक या सरकारी कर्मचारी जिसे प्रगणक बनाया जाएगा, वह घर-घर जाकर जानकारी दर्ज करेगा। उसके ऊपर एक पर्यवेक्षक होगा जो उसके काम की जांच करेगा। ऐसे व्यक्तियों का चयन किया जाएगा जो जिम्मेदार, पढ़े-लिखे और तकनीकी उपकरण चलाने में सक्षम हों।
मकान की परिभाषा भी स्पष्ट की गई। यदि कोई व्यक्ति खेत में अस्थायी झोपड़ी बनाकर रहता है तो उसे भी जनगणना मकान माना जाएगा। यदि किसी दुकान के पीछे परिवार रहता है तो उसे भी अलग से दर्ज किया जाएगा। इसी तरह यदि किसी घर में किराएदार रहते हैं तो उन्हें भी अलग परिवार के रूप में दर्ज किया जाएगा। मकानों की नंबरिंग इस प्रकार होगी कि भविष्य में भी पहचान आसान रहे।
इस दो दिवसीय प्रशिक्षण के पहले दिन अधिकारियों और कर्मचारियों को यह समझाया गया कि 2027 की जनगणना आधुनिक तकनीक, पारदर्शिता और कानूनी प्रावधानों के साथ होगी। इसका उद्देश्य हर नागरिक की सही और पूरी जानकारी दर्ज करना है, ताकि आने वाले वर्षों में विकास योजनाएं वास्तविक जरूरतों के अनुसार बनाई जा सकें।

