कोरबा, छत्तीसगढ़। जिले के पाली में प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर 15 और 16 फरवरी 2026 को दो दिवसीय पाली महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। शिव की पावन नगरी पाली में आयोजित यह महोत्सव धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक संगीत का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है। दूर-दूर से श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ के दर्शन के लिए पहुंचते हैं और स्थानीय जनमानस इस पर्व को उत्सव के रूप में मनाता है। इसी महोत्सव को लेकर अब प्रशासन और गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के बीच विवाद की स्थिति निर्मित हो गई है। पार्टी की ओर से जिला कलेक्टर के माध्यम से अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) पाली को जिलाधीश के नाम ज्ञापन सौंपकर मांग की गई थी कि महाशिवरात्रि के अवसर पर 15 और 16 फरवरी को पाली क्षेत्र में संचालित देशी एवं विदेशी शराब दुकानों को बंद किया जाए, ताकि पर्व की गरिमा और धार्मिक भावना अक्षुण्ण बनी रहे।
ज्ञापन पर कार्रवाई नहीं, पार्टी में आक्रोश
गोंडवाना गणतंत्र पार्टी का आरोप है कि प्रशासन ने उनके ज्ञापन पर किसी प्रकार का संज्ञान नहीं लिया और न ही महोत्सव के दौरान शराब दुकानों को बंद करने का कोई निर्णय लिया गया। इसे लेकर पार्टी में गहरा असंतोष है।पार्टी के युवा मोर्चा जिला अध्यक्ष जगत नेताम ने कहा कि पवित्र महाशिवरात्रि पर्व पर दो दिन शराब दुकान बंद नहीं करना जन अपेक्षाओं के साथ कुठाराघात है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार को केवल राजस्व वृद्धि की चिंता है, जबकि धार्मिक और सांस्कृतिक भावनाओं की उपेक्षा की जा रही है। उनका कहना है कि यदि राजिम कुंभ मेला जैसे ऐतिहासिक आयोजन में 1 फरवरी से 15 फरवरी 2026 तक मेला क्षेत्र के आसपास सभी देशी और विदेशी मदिरा दुकानों पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है, तो पाली महोत्सव के सम्मान में दो दिन शराबबंदी क्यों नहीं की जा सकती।
राजिम कुंभ का उदाहरण, पाली में अलग रवैया?
गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने राजिम कुंभ मेले का उदाहरण देते हुए प्रशासन के निर्णय पर सवाल उठाया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि जब कुंभ मेले के दौरान पूरे क्षेत्र में शराब बिक्री पर रोक लगाई गई, तब पाली महोत्सव जैसे धार्मिक आयोजन में समान संवेदनशीलता क्यों नहीं दिखाई गई। वहीं पार्टी का आरोप है कि पाली महोत्सव को केवल औपचारिकता के रूप में लिया जा रहा है, जबकि यह स्थानीय आस्था और परंपरा से गहराई से जुड़ा आयोजन है। उनका कहना है कि यदि जिला प्रशासन भविष्य में भी इसी प्रकार हठधर्मिता पर अडिग रहा और महाशिवरात्रि जैसे पवित्र अवसर पर शराब दुकानों को बंद नहीं किया गया, तो गोंडवाना गणतंत्र पार्टी व्यापक विरोध आंदोलन करेगी।
लोक संस्कृति के सम्मान की बात
पार्टी ने यह भी स्पष्ट किया है कि महाशिवरात्रि और स्थानीय मड़ई मेला छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति का प्रतीक है। पूर्व वर्षों की परंपरा को याद करते हुए उन्होंने कहा कि करमा, डंडा, सुआ, ददरिया, बांसगीत, पंथी नृत्य और गौरी-गौरा जैसे पारंपरिक सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से क्षेत्र की जनभावनाओं का सम्मान किया जाता रहा है। साथ ही पार्टी का कहना है कि यदि जिला प्रशासन वास्तव में पाली महोत्सव का सम्मान करना चाहता है, तो उसे कम से कम दो दिनों के लिए शराब दुकानों को बंद कर धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों को प्राथमिकता देनी चाहिए। जिस प्रकार राजिम कुंभ मेले में 15 दिनों तक शराबबंदी लागू रही, उसी प्रकार पाली महोत्सव के सम्मान में दो दिन का प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए।

