बिलासपुर, छत्तीसगढ़। छत्तीसगढ़ की न्यायधानी बिलासपुर में हुई 3.35 करोड़ रुपये की सनसनीखेज सराफा लूट का पुलिस ने तेज़, सटीक और हाईटेक ऑपरेशन के जरिए खुलासा कर दिया है। राजकिशोर नगर में कारोबारी संतोष तिवारी से हुई इस बड़ी वारदात के बाद बिलासपुर पुलिस ने बिना समय गंवाए दस विशेष टीमों का गठन किया और ‘गेट-सेट-गो’ रणनीति के साथ अंतरराज्यीय स्तर पर शिकंजा कस दिया। जांच की सुई उत्तर प्रदेश की ओर घूमी और अंततः मिर्जापुर में घेराबंदी कर चार आरोपियों को धर दबोचा गया।
लूट को अंजाम देकर फरार हुए बदमाश लगातार ठिकाने बदल रहे थे, लेकिन पुलिस की पैनी नजर और तकनीकी ट्रैकिंग से बच नहीं सके। जैसे ही पुलिस टीम मिर्जापुर में उनके करीब पहुंची, आरोपियों ने घबराकर फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में एक बदमाश के पैर में गोली लगी, जिससे गिरोह के बाकी सदस्यों के हौसले टूट गए और उन्होंने हथियार डाल दिए। इस संक्षिप्त मुठभेड़ के बाद चारों आरोपियों को हिरासत में लेकर कड़ी सुरक्षा में पूछताछ शुरू कर दी गई है।
इस पूरे ऑपरेशन में बिलासपुर पुलिस की दोहरी रणनीति निर्णायक साबित हुई। एक ओर बीट स्तर के पुलिसकर्मियों ने जमीनी नेटवर्क को सक्रिय करते हुए उरतुम के पास लावारिस मिली कार और स्थानीय इनपुट के आधार पर भागने के रूट को ट्रैक किया, वहीं दूसरी ओर डिजिटल सर्विलांस ने केस की दिशा साफ कर दी। टॉवर डंप डेटा का विश्लेषण, सैकड़ों सीसीटीवी फुटेज की बारीक जांच और नेफिस सर्वर से फिंगरप्रिंट मिलान ने आरोपियों की पहचान पुख्ता कर दी। तकनीक और मानवीय सूझबूझ के इस तालमेल ने पुलिस को तेजी से नतीजे तक पहुंचाया।
जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह ने वारदात के लिए चोरी की गाड़ियों का इस्तेमाल किया था और पूरी साजिश बेहद सुनियोजित तरीके से रची गई थी। अलग-अलग राज्यों से वाहनों की व्यवस्था कर उन्होंने पुलिस को भ्रमित करने की कोशिश की, लेकिन लगातार पीछा और डाटा एनालिसिस ने उनकी चालाकी पर पानी फेर दिया। पुलिस अब लूट की रकम की बरामदगी और गिरोह के अन्य संभावित साथियों की तलाश में जुटी है। इस बड़ी सफलता के साथ बिलासपुर पुलिस ने साफ कर दिया है कि अपराध चाहे जितना संगठित क्यों न हो, कानून की पकड़ से बच पाना अब आसान नहीं।

