जमशेदपुर, झारखण्ड। आदिवासी समाज की बहुआयामी समस्याओं के समाधान को लेकर एक महत्वपूर्ण पहल के तहत छत्तीसगढ़ के आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों ने पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा से उनके निवास जमशेदपुर में रात्रिकालीन सौजन्य भेंट की। यह मुलाकात अनुसूचित जनजाति समाज के अधिकारों, रोजगार, शिक्षा और संवैधानिक प्रावधानों के प्रभावी क्रियान्वयन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण रही। भेंट के दौरान अनुसूचित जनजाति शासकीय सेवक विकास संघ छत्तीसगढ़ के प्रांताध्यक्ष आर एन ध्रुव, गोंडवाना गोंड महासभा के राष्ट्रीय सचिव एवं बिलासपुर जिलाध्यक्ष आर सी ध्रुव तथा सामाजिक प्रमुख नारायण सिदार जिला सक्ती उपस्थित रहे। प्रतिनिधिमंडल ने देश और विशेष रूप से छत्तीसगढ़ में आदिवासी समाज से जुड़े गंभीर मुद्दों को विस्तारपूर्वक रखा।
बैठक में प्रमुख रूप से छत्तीसगढ़ में पदोन्नति में आरक्षण के प्रभावी क्रियान्वयन, न्यायालय के निर्देशानुसार सहायक शिक्षकों की भर्ती हेतु छठवीं काउंसलिंग शीघ्र प्रारंभ किए जाने, तथा इस संबंध में राज्य शासन को स्पष्ट निर्देश जारी कराने का अनुरोध किया गया। प्रतिनिधियों ने बताया कि यदि छठवीं काउंसलिंग प्रारंभ होती है, तो प्रदेश के लगभग 1600 डीएडधारी आदिवासी बेरोजगार युवाओं के लिए शासकीय सेवा में प्रवेश का मार्ग प्रशस्त होगा। इस संदर्भ में यह भी अवगत कराया गया कि अपनी न्यायोचित मांगों को लेकर वर्तमान में आदिवासी अभ्यर्थी नया रायपुर स्थित तूता धरना स्थल में शांतिपूर्ण धरना–प्रदर्शन कर रहे हैं, किंतु अब तक ठोस निर्णय का अभाव बना हुआ है।
चर्चा के दौरान पांचवीं अनुसूची क्षेत्रों में स्थानीय भर्ती प्रक्रिया प्रारंभ करने, शिक्षा के क्षेत्र में अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए लागू ढाई लाख वार्षिक आय सीमा की बाध्यता समाप्त करने तथा फर्जी जाति प्रमाण पत्र धारियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी गंभीर विमर्श हुआ। अर्जुन मुंडा ने आदिवासी समाज के संवैधानिक अधिकारों, न्यायिक निर्देशों और नीति-स्तरीय समाधानों पर मार्गदर्शन प्रदान किया। बैठक उपरांत प्रतिनिधिमंडल ने अर्जुन मुंडा एवं उनके परिवार के साथ उनके निवास पर रात्रि भोज किया। इस अवसर पर आत्मीयता और सहयोग के लिए प्रतिनिधियों की ओर से परिवार के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया गया।

