Saturday, March 7, 2026
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केल्हारी राशन घोटाले पर प्रशासन का बड़ा प्रहार: 81.86 क्विंटल चावल गबन मामले में केल्हारी शा.उ.मू. दुकान निरस्त, केवटी में संलग्न

एमसीबी, छत्तीसगढ़। केल्हारी ग्राम पंचायत स्थित शासकीय उचित मूल्य राशन दुकान में गरीबों के हक पर वर्षों से चल रही सुनियोजित लूट पर आखिरकार प्रशासन ने सख्त कार्रवाई करते हुए बड़ा एक्शन लिया है। शासकीय जांच में 81.86 क्विंटल चावल सहित शक्कर एवं नमक के बड़े पैमाने पर गबन की पुष्टि होने के बाद शासकीय उचित मूल्य दुकान केल्हारी को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया गया है। साथ ही दुकान को शासकीय उचित मूल्य दुकान केवटी में संलग्न कर दिया गया है। इस निर्णायक कार्रवाई से पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया है और इसे सार्वजनिक वितरण प्रणाली में भ्रष्टाचार के विरुद्ध बड़ा प्रशासनिक वार माना जा रहा है।

यह मामला तब सामने आया जब ग्राम सरपंच केल्हारी सहित संतोष जायसवाल, कुंवर सिंह, अमोनी, अंजू, उमा, सुनीता, सीमा, प्रेमवती, दयावती, राजकुमारी एवं रामकली ने अनुविभागीय दंडाधिकारी केल्हारी को लिखित शिकायत सौंपकर राशन दुकान में गंभीर अनियमितताओं और खाद्यान्न गबन के आरोप लगाए। शिकायत में स्पष्ट किया गया था कि हितग्राहियों को कम राशन वितरित किया जा रहा है और शेष खाद्यान्न का गबन कर हेराफेरी की जा रही है। शिकायत के पश्चात खाद्य निरीक्षक केल्हारी द्वारा किए गए भौतिक सत्यापन में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। अपराजिता स्व-सहायता समूह केल्हारी को आबंटित शासकीय उचित मूल्य दुकान केल्हारी (आईडी-532002005) में चावल 81.86 क्विंटल, शक्कर 1.61 क्विंटल एवं नमक 1.90 क्विंटल की भारी कमी पाई गई। जांच में यह भी प्रमाणित हुआ कि हितग्राहियों को जानबूझकर कम राशन दिया जा रहा था और शेष खाद्यान्न का गबन किया जा रहा था।

जांच के दौरान यह भी उजागर हुआ कि राशन विक्रेता राजेन्द्र प्रताप सिंह उर्फ मुन्ना सिंह स्वयं दुकान पर उपस्थित रहकर वितरण नहीं करता था, बल्कि अपने भाई एवं सहायक के माध्यम से राशन बंटवाया जा रहा था, जो सार्वजनिक वितरण प्रणाली के नियमों का खुला उल्लंघन है। कई हितग्राहियों को यह तक नहीं बताया जाता था कि उन्हें किस माह का राशन दिया जा रहा है। दिव्यांग हितग्राही संतोष जायसवाल के राशन गबन का मामला इस पूरे प्रकरण की सबसे संवेदनशील कड़ी बनकर सामने आया। ग्रामीणों के अनुसार दुकान समय पर नहीं खोली जाती थी और प्रतिदिन केवल दो से तीन घंटे ही संचालित होती थी। राशन लेने पहुंचे गरीब परिवारों को अक्सर यह कहकर लौटा दिया जाता था कि आज राशन नहीं मिलेगा या बाद में आना होगा। शासकीय जांच में यह भी सामने आया कि जून, जुलाई एवं अगस्त माह का खाद्यान्न बड़ी संख्या में पात्र हितग्राहियों को पूर्ण रूप से वितरित ही नहीं किया गया। कई परिवारों को जून और जुलाई माह की शक्कर एवं चना अब तक नहीं मिला।

 

विगत 16 अक्टूबर 2025 को किए गए पुनः निरीक्षण में भ्रष्टाचार की तस्वीर और स्पष्ट हो गई। कागजों में दुकान का संचालन अपराजिता स्व-सहायता समूह के नाम पर दर्ज था, जबकि वास्तविक रूप से ई-पॉस मशीन का संचालन एवं राशन वितरण सहायक संदीप कुमार गुप्ता द्वारा किया जा रहा था। निरीक्षण के दौरान मौजूद राशन कार्ड धारकों ने अधिकारियों के समक्ष नियमित एवं समयबद्ध वितरण न होने की शिकायत दर्ज कराईं।

ऑनलाइन स्टॉक एवं भौतिक सत्यापन के तुलनात्मक परीक्षण में यह निर्विवाद रूप से सिद्ध हो गया कि चावल 81.86 क्विंटल, शक्कर 1.61 क्विंटल एवं नमक 1.90 क्विंटल की कमी है। जांच प्रतिवेदन में स्पष्ट उल्लेख किया गया कि इस गंभीर खाद्यान्न कमी की पूरी जिम्मेदारी शासकीय उचित मूल्य दुकान के संचालनकर्ता अपराजिता स्व-सहायता समूह केल्हारी एवं विक्रेता राजेन्द्र प्रताप सिंह पर बनती है। प्रकरण में कार्यालयीन कारण बताओ नोटिस क्रमांक 1226, 1230, 1236/वाचक/2025 केल्हारी 4 नवंबर 2025 को संबंधित समूह को जारी किया गया था, किंतु अपराजिता स्व-सहायता समूह के अध्यक्ष द्वारा कोई जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया। वहीं विक्रेता द्वारा प्रस्तुत जवाब भी असंतोषजनक पाया गया।

जांच में यह कृत्य छत्तीसगढ़ सार्वजनिक वितरण प्रणाली (नियंत्रण) आदेश 2016 की कंडिका 11(11), 13(1), 13(2) एवं 15 तथा अनुबंध-प्राधिकार पत्र की शर्त क्रमांक 05, 12, 15, 18, 27 एवं 28 का स्पष्ट उल्लंघन पाया गया, जो आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 की धारा 3/7 के अंतर्गत दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है। फलस्वरूप अपराजिता स्व-सहायता समूह केल्हारी को आबंटित शासकीय उचित मूल्य दुकान केल्हारी का आबंटन निरस्त करते हुए दुकान को शासकीय उचित मूल्य दुकान केवटी (आईडी-532002054) में संलग्न किया गया है। आगामी आदेश तक शासकीय उचित मूल्य दुकान केवटी का संचालन उसके अध्यक्ष/सचिव/विक्रेता द्वारा किया जाएगा। आदेश तत्काल प्रभाव शील घोषित किया गया है।

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