Monday, February 9, 2026
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मनेंद्रगढ़ शासकीय कन्या विद्यालय में एनीमिया जागरूकता से लेकर सुरक्षा कानूनों तक, बालिकाओं को किया गया सशक्त

एमसीबी, छत्तीसगढ़। राष्ट्रीय बालिका दिवस भारत में प्रतिवर्ष 24 जनवरी को मनाया जाता है। इसकी शुरुआत महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा वर्ष 2008 में की गई थी। इस दिवस का उद्देश्य बालिकाओं के अधिकारों के संरक्षण, सेव द गर्ल चाइल्ड, चाइल्ड सेक्स रेशियो में सुधार, बालिकाओं के स्वास्थ्य, शिक्षा एवं सुरक्षित वातावरण के निर्माण को लेकर समाज में व्यापक जन जागरूकता फैलाना है।

इसी कड़ी में महिला एवं बाल विकास विभाग अंतर्गत महिला सशक्तिकरण (हब) द्वारा 16 जनवरी 2026 से 30 जनवरी 2026 तक 15 दिवसीय विशेष जागरूकता अभियान का आयोजन किया जा रहा है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य बालिकाओं एवं महिलाओं के अधिकारों, स्वास्थ्य, सुरक्षा एवं सशक्तिकरण के प्रति समाज को जागरूक करना है, ताकि वे अपने अधिकारों को पहचान सकें और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ सकें।इस अभियान के अंतर्गत आज शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय (ई-स्वर्ग), मनेंद्रगढ़ में राष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी के आदेशानुसार तथा जिला कार्यक्रम अधिकारी के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। कार्यक्रम के दौरान छात्राओं के स्वास्थ्य से जुड़े विषयों पर विशेष रूप से एनीमिया को लेकर जनजागरूकता गतिविधियां आयोजित की गईं। बालिकाओं को एनीमिया के कारण, लक्षण, रोकथाम के उपाय तथा संतुलित एवं पोषणयुक्त आहार के महत्व की विस्तृत जानकारी प्रदान की गई, ताकि वे स्वयं के साथ-साथ अपने परिवार को भी स्वास्थ्य के प्रति जागरूक कर सकें।

यह कार्यक्रम महिला एवं बाल विकास विभाग, महिला सशक्तिकरण (हब) एवं सखी वन स्टॉप सेंटर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में पीसीपीएनडीटी अधिनियम 1994, लिंग चयन प्रतिषेध अधिनियम 1994, घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम 2005, सखी वन स्टॉप सेंटर की सेवाएं, बाल विवाह प्रतिषेध, गुड टच-बैड टच की जानकारी दी गई। साथ ही महिला हेल्पलाइन 181, चाइल्ड हेल्पलाइन 1098, आपातकालीन सेवा 112 एवं साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 के संबंध में भी विस्तार से अवगत कराया गया। कार्यक्रम के समापन अवसर पर उपस्थित समस्त बालिकाओं को “बाल विवाह मुक्त भारत” की शपथ दिलाई गई तथा उन्हें आत्मनिर्भर, सशक्त एवं जागरूक नागरिक बनने के लिए प्रेरित किया गया। यह 15 दिवसीय विशेष जागरूकता अभियान बालिकाओं के सर्वांगीण विकास, सुरक्षा एवं उज्ज्वल भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण और सराहनीय पहल के रूप में सामने आया है।

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