एमसीबी, छत्तीसगढ़। जिले के जनपद पंचायत मनेन्द्रगढ़ की ग्राम पंचायत पसौरी में महात्मा गांधी नरेगा योजना के तहत विगत दो वर्षों में कोई भी कार्य स्वीकृत नहीं होने संबंधी खबरें न्यूज पोर्टल एवं सोशल मीडिया पर प्रसारित की जा रही हैं, जो तथ्यहीन और भ्रामक हैं । वास्तविक स्थिति यह है कि ग्राम पंचायत पसौरी में मनरेगा योजना पूरी सक्रियता के साथ संचालित की जा रही है और पंजीकृत परिवारों को मांग के आधार पर समय-सीमा में लगातार रोजगार उपलब्ध कराया गया है। ग्राम पंचायत पसौरी में कुल 370 सक्रिय परिवार मनरेगा अंतर्गत पंजीकृत हैं। वित्तीय वर्ष 2024-25 में 289 परिवारों को तथा वित्तीय वर्ष 2025-26 में 210 परिवारों को मांग के अनुरूप रोजगार उपलब्ध कराया गया है। इन दोनों वर्षों में कुल 18,310 मानव दिवस का सृजन किया गया है, जो यह स्पष्ट करता है कि पंचायत में रोजगार की कोई कमी नहीं रही है। विगत दो वर्षों में मनरेगा अंतर्गत कुल 110 विभिन्न कार्य कराए गए हैं, जिन पर लगभग 43.38 लाख रुपये की लागत आई है।
मनरेगा के साथ-साथ प्रधानमंत्री आवास योजना का भी पंचायत में प्रभावी क्रियान्वयन किया गया है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में 85 आवासों में प्रथम किस्त जारी की गई, जिनमें से 59 आवास पूर्ण कराए जा चुके हैं। वहीं वित्तीय वर्ष 2025-26 में 46 आवासों में प्रथम किस्त जारी की गई है, जिनमें से 24 आवास वर्तमान में निर्माणाधीन हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना से जुड़े कार्यों के माध्यम से मनरेगा पंजीकृत परिवारों को 7,146 मानव दिवस का अतिरिक्त रोजगार भी उपलब्ध कराया गया है। वर्तमान अवधि में भी ग्राम पंचायत पसौरी में मनरेगा के तहत 8 कार्य प्रगतिरत हैं, जिनकी लागत 10 लाख रुपये से अधिक है। इसके अतिरिक्त प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के अंतर्गत 35 आवासीय कार्य भी लगातार जारी हैं। यह स्थिति न केवल पसौरी पंचायत में बल्कि जनपद की अन्य पंचायतों में भी बनी हुई है, जहां रोजगार की कमी कभी नहीं रही है।
मनरेगा योजना के मूल उद्देश्य के अनुरूप मांग आधारित रोजगार की उपलब्धता ग्राम पंचायत पसौरी में हर वर्ष सुनिश्चित की गई है। मनरेगा का ऑनलाइन एमआईएस पोर्टल भी इस तथ्य की पुष्टि करता है कि किसी भी वर्ष पंचायत में रोजगार का अभाव नहीं रहा। ऐसे में ऑनलाइन न्यूज़ पोर्टल एवं सोशल मीडिया पर प्रसारित की जा रही खबर पूरी तरह गलत, भ्रामक और वास्तविक तथ्यों के विपरीत है। ग्राम पंचायत पसौरी में न केवल पर्याप्त रोजगार उपलब्ध है, बल्कि शासन की योजनाओं के माध्यम से ग्रामीणों को लगातार आर्थिक संबल भी मिल रहा है।

