Sunday, January 11, 2026
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सफलता की कहानी: डिजिटल धान खरीदी से बढ़ा भरोसा, किसान को समय पर मिला पूरा भुगतान

एमसीबी, छत्तीसगढ़। खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में छत्तीसगढ़ सरकार की पारदर्शी और डिजिटल धान खरीदी व्यवस्था किसानों के लिए विश्वास और राहत का मजबूत आधार बन रही है। बदली हुई इस व्यवस्था की सफलता की एक सशक्त मिसाल ग्राम उधनापुर निवासी किसान प्रताप सिंह की कहानी है।

किसान प्रताप सिंह ने कौड़ीमार उपार्जन केंद्र में 36 क्विंटल धान का विक्रय किया। शासन द्वारा निर्धारित 3100 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य और प्रति एकड़ 21 क्विंटल तक धान खरीदी की नीति के तहत उन्हें उनकी उपज का उचित मूल्य प्राप्त हुआ।

प्रताप सिंह का ऑनलाइन टोकन पूर्व में ही जारी हो गया था, जिससे वे निर्धारित तिथि पर उपार्जन केंद्र पहुंचे और बिना किसी परेशानी के धान विक्रय की पूरी प्रक्रिया संपन्न हुई। उपार्जन केंद्र में किसानों के लिए बैठने की व्यवस्था, पेयजल सहित सभी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध रहीं।

धान की तौल डिजिटल कांटे से की गई, जिससे माप-तौल पूरी तरह पारदर्शी रही। तौल एवं सत्यापन के तुरंत बाद धान विक्रय की राशि सीधे किसान के बैंक खाते में जमा कर दी गई। इससे भुगतान को लेकर किसी प्रकार की शंका या विलंब नहीं हुआ।

किसान प्रताप सिंह बताते हैं कि पूर्व वर्षों में धान बेचने के दौरान तौल और भुगतान में देरी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता था, लेकिन इस वर्ष की डिजिटल व्यवस्था से उनका भरोसा पूरी तरह मजबूत हुआ है। समय पर भुगतान मिलने से वे अब रबी फसल की तैयारी, बच्चों की पढ़ाई और घरेलू आवश्यकताओं की योजना निश्चिंत होकर बना पा रहे हैं।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में लागू की गई यह किसान-हितैषी धान खरीदी व्यवस्था प्रदेश के किसानों के जीवन में आर्थिक स्थिरता और विश्वास का नया अध्याय लिख रही है। किसान प्रताप सिंह की यह कहानी बदली व्यवस्था की जमीनी सफलता का स्पष्ट और प्रेरक उदाहरण है।

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