Sunday, January 11, 2026
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रेल मंत्री से विशेष रियायत की मांग: अमरकंटक अखिल गोंडवाना धर्म–संस्कृति सम्मेलन के श्रद्धालुओं के लिए निःशुल्क या रियायती रेल यात्रा की मांग

अनुकपुर। अमरकंटक में 11 से 15 जनवरी 2026 तक आयोजित होने वाले अखिल गोंडवाना गोंडी धर्म, संस्कृति, साहित्य सम्मेलन एवं बड़ा देव महापूजन के लिए गोंडवाना सेवा ट्रस्ट अमरकंटक ने केंद्र सरकार और रेलवे प्रशासन से विशेष सहयोग की मांग की है। ट्रस्ट द्वारा केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि इस राष्ट्रीय स्तर के आयोजन में देश के विभिन्न राज्यों से हजारों की संख्या में गोंड समाज के लोग, श्रद्धालु, ग्रामीण, मजदूर और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोग रेल मार्ग से अमरकंटक पहुंचेंगे। ऐसे में इन प्रतिभागियों को निःशुल्क या रियायती दर पर रेल यात्रा की सुविधा उपलब्ध कराई जाए ताकि आर्थिक अभाव किसी भी श्रद्धालु की आस्था और संस्कृति से जुड़ने की राह में बाधा न बने।

गोंडवाना सेवा ट्रस्ट ने स्पष्ट किया है कि यह आयोजन केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं बल्कि गोंड समाज की हजारों वर्षों पुरानी परंपरा, संस्कृति, रीति-नीति, भाषा और साहित्य के संरक्षण का जीवंत मंच है। पांच दिन तक चलने वाले इस महापर्व में बड़ा देव महापूजन, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, सामाजिक विमर्श, साहित्यिक संगोष्ठियां और पहचान से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा प्रस्तावित है। ट्रस्ट ने कहा कि देश के दूर-दराज के आदिवासी बहुल क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग इस आयोजन में सम्मिलित होने के लिए उत्सुक हैं, किंतु आर्थिक कमज़ोरी के कारण यात्रा व्यय वहन करना उनके लिए कठिन हो रहा है।

इसी परिप्रेक्ष्य में ट्रस्ट ने रेल मंत्री के साथ-साथ जबलपुर रेलवे जोन और बिलासपुर रेलवे जोन के महाप्रबंधकों को भी पत्र भेजकर अनुरोध किया है कि संबंधित रेल मंडलों के माध्यम से यात्रा रियायत की विशेष व्यवस्था की जाए। पत्र में मांग की गई है कि सामूहिक पहचान चिन्ह या ‘बिल्ला’ लगाए हुए प्रतिभागियों को रियायती टिकट या निःशुल्क यात्रा सुविधा प्रदान की जाए। इससे न केवल आर्थिक रूप से कमजोर यात्रियों को राहत मिलेगी बल्कि संस्कृति संरक्षण के इस महत्त्वपूर्ण आयोजन में अधिक से अधिक लोगों की सहभागिता भी सुनिश्चित हो सकेगी।

ट्रस्ट का कहना है कि अमरकंटक गोंड समाज के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विख्यात है और यहां आयोजित बड़ा देव महापूजन आदिवासी परंपरा का एक अत्यंत महत्वपूर्ण अंग है। इस कार्यक्रम में शामिल होना श्रद्धालुओं के लिए आस्था, पहचान और सामुदायिक एकता का प्रतीक है। रेलवे मंत्रालय से की गई इस मांग के बाद समाज के बीच उम्मीदें बढ़ गई हैं और सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि रेलवे प्रशासन इस सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व के आयोजन के लिए किस प्रकार की रियायतें उपलब्ध कराता है।

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