Sunday, January 11, 2026
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कोया पूनेम गोंडवाना महासभा के हस्तक्षेप के बाद जिले की आदिम जाति सेवा सहकारी समितियों में बड़ी कार्रवाई, तीन प्राधिकृत अधिकारी पद से हटाए गए

कोरिया, छत्तीसगढ़। जिले के बैकुंठपुर विकासखंड से जुड़ी तीन आदिम जाति सेवा सहकारी समितियों के बहुचर्चित प्रकरण में सहकारिता विभाग ने निर्णायक रुख अपनाते हुए बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की है। माननीय उच्च न्यायालय छत्तीसगढ़, बिलासपुर तथा संयुक्त पंजीयक सहकारी संस्थाएं, सरगुजा संभाग अंबिकापुर के आदेश के अनुपालन में तीन प्राधिकृत अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से पद से हटा दिया गया है। लंबे समय से लंबित चुनाव प्रक्रिया को लेकर अब 15 दिनों के भीतर वैधानिक कार्रवाई पूर्ण करने के स्पष्ट निर्देश जारी कर दिए गए हैं।उच्च न्यायालय के आदेश के बाद सख्त हुई कार्रवाई

संयुक्त पंजीयक सहकारी संस्थाएं, सरगुजा संभाग अंबिकापुर द्वारा 30 दिसंबर 2025 को जारी आदेश में कहा गया है कि यह कार्रवाई उच्च न्यायालय द्वारा WPC 5513/2025 में 17 अक्टूबर 2025 को पारित आदेश के अनुपालन में की गई है। याचिकाकर्ता शिवदर्शन सिंह एवं अन्य ने समिति में चुनाव नहीं कराए जाने के विरोध में न्यायालय की शरण ली थी। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने नवीन अभ्यावेदन प्रस्तुत करने तथा संबंधित प्राधिकारियों को छत्तीसगढ़ सहकारी सोसायटी अधिनियम 1960 की धारा 49(8) के तहत नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। इसी के बाद पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच प्रारंभ हुई।पात्रता नहीं होने के बाद भी दी गई थी जिम्मेदारी, जांच में हुआ खुलासा

जांच रिपोर्ट में यह तथ्य सामने आया कि प्रतिवादी क्रमांक 6 न तो समिति के अंशधारी सदस्य हैं और न ही समिति या बोर्ड के सदस्य के रूप में काम करने के लिए आवश्यक चार वर्ष का अनुभव रखते हैं। विगत पांच वर्षों में किसी भी वार्षिक सामान्य सभा में उनकी उपस्थिति भी दर्ज नहीं पाई गई। साथ ही राज्य शासन से किसी प्रकार की छूट या अनुमति संबंधी दस्तावेज भी प्रस्तुत नहीं किए गए। इस आधार पर उन्हें छत्तीसगढ़ सहकारी सोसायटी अधिनियम 1960 की धारा 49(8)(1) के अंतर्गत प्राधिकृत अधिकारी के रूप में अर्ह नहीं पाया गया। इसके अतिरिक्त यह भी सामने आया कि समिति द्वारा अब तक राज्य सहकारी निर्वाचन आयोग को चुनाव कराने का प्रस्ताव एवं मतदाता सूची प्रेषित नहीं की गई, जिसके कारण चुनाव प्रक्रिया प्रारंभ ही नहीं हो सकी। इसे गंभीर प्रशासनिक लापरवाही माना गया है। इसी क्रम में सहायक पंजीयक सहकारी संस्थाएं बैकुंठपुर ने 8 जनवरी 2026 को संशोधित आदेश जारी कर पूर्व में नियुक्त अशासकीय व्यक्तियों को प्राधिकृत अधिकारी के पद से हटा दिया और उनके स्थान पर सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित की शाखाओं से तीन अधिकारियों को प्राधिकृत अधिकारी नियुक्त कर दिया।

गोंडवाना नेता के हस्तक्षेप के बाद तेज हुई प्रशासनिक सक्रियता

कार्रवाई तेज होने के पीछे सामाजिक हस्तक्षेप भी महत्वपूर्ण रहा। ठीक एक दिन पूर्व गोंडवाना नेता एवं कोया पूनेम गोंडवाना महासभा कोरिया के जिला अध्यक्ष रमेश टेकाम ने एसडीएम से मुलाकात कर इस प्रकरण पर कड़ा विरोध दर्ज कराया था। उन्होंने उच्च न्यायालय के आदेश के पालन में हो रही देरी का मुद्दा प्रमुखता से उठाया, जिसके बाद विभागीय सक्रियता बढ़ी और तीन प्राधिकृत अधिकारियों को हटाने की कार्रवाई तत्काल प्रभाव से की गई। इस घटनाक्रम के बाद जिले भर में सहकारी संस्थाओं की कार्यप्रणाली को लेकर नई बहस छिड़ गई है। सहकारिता विभाग की यह कार्रवाई नियमसम्मत व्यवस्था स्थापित करने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि शेष नियम विरुद्ध नियुक्तियों पर आगे क्या कार्रवाई होती है और 15 दिनों की समय-सीमा के भीतर चुनाव प्रक्रिया किस गति से आगे बढ़ाई जाती है।

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