Wednesday, January 14, 2026
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लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक हुई सम्पन्न: नल कनेक्शन पर मोहम्मद कैसर अब्दुलहक की सख्त निर्देश

एमसीबी, छत्तीसगढ़। मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले में जल जीवन मिशन एवं उससे संबंद्ध सभी योजनाओं की प्रगति की व्यापक और गहन समीक्षा आज जनपद पंचायत मनेंद्रगढ़ के अमृत सदन सभाकक्ष में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता छत्तीसगढ़ शासन, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव मोहम्मद कैसर अब्दुलहक ने की। बैठक कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी डी. राहुल वेंकट के मार्गदर्शन में संपन्न हुई। इस अवसर पर जिला पंचायत सीईओ श्रीमती अंकिता सोम, मुख्य अभियंता संजय सिंह, अभिक्षण अभियंता प्रमोद सिंह, कार्यपालन अभियंता ओमकार सिंह एवं समस्त जनपद पंचायत सीईओ, पीएचई विभाग, पंचायत विभाग, नगर निगम चिरमिरी, क्रेडा एवं अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।बैठक में जिले में जल जीवन मिशन के अंतर्गत संचालित योजनाओं की भौतिक, वित्तीय और प्रायोगिक स्थिति की विस्तार से समीक्षा की गई। इस अवसर पर सचिव मोहम्मद कैसर अब्दुलहक ने अधिकारियों को स्पष्ट शब्दों में निर्देश देते हुए कहा कि जल जीवन मिशन को केवल निर्माण आधारित योजना के रूप में नहीं देखा जाए, बल्कि इसे सतत और नियमित जल आपूर्ति से जोड़कर लागू किया जाए। उन्होंने कहा कि किसी भी योजना को तब तक पूर्ण नहीं माना जाएगा, जब तक वह शत-प्रतिशत फंक्शनल होकर आम नागरिकों को वास्तविक लाभ न दे। सचिव ने यह भी स्पष्ट किया कि कागजों में प्रगति दिखाने की प्रवृत्ति पर पूर्ण विराम लगाया जाए और फील्ड स्तर पर वास्तविक स्थिति के अनुरूप ही रिपोर्टिंग सुनिश्चित की जाए।

सचिव ने आईएमआईएस पोर्टल में की जा रही प्रविष्टियों पर विशेष जोर देते हुए कहा कि सभी योजनाओं, नल कनेक्शनों, जल स्रोतों और प्रमाणिकरण की जानकारी समय पर, सटीक और सत्यापित रूप में दर्ज की जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि गलत या अधूरी प्रविष्टियां न केवल योजना की गुणवत्ता को प्रभावित करती हैं, बल्कि शासन स्तर पर गलत निर्णय का कारण भी बन सकती हैं। उन्होंने जिला एवं जनपद स्तर के अधिकारियों को नियमित मॉनिटरिंग कर डेटा की क्रॉस-वेरिफिकेशन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

बैठक में कलेक्टर डी. राहुल वेंकट ने जानकारी दी गई कि मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले में कुल 392 ग्राम हैं, जहां 83 हजार 345 ग्रामीण परिवार निवासरत हैं। जिले में हर घर जल के लिए कुल 1120 जल प्रदाय योजनाएं स्वीकृत हैं, जिनमें 110 रेट्रोफिटिंग योजनाएं, 488 नवीन एकल ग्राम योजनाएं, 131 सोलर आधारित योजनाएं, 384 स्कूल एवं आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए रनिंग वाटर योजनाएं तथा 7 बल्क वाटर सप्लाई योजनाएं शामिल हैं। इसके अतिरिक्त 668 सोलर पंप प्रस्तावित हैं, जिनमें से बड़ी संख्या में स्थापना कार्य पूर्ण किया जा चुका है। हर घर जल प्रमाणिकरण की स्थिति पर चर्चा करते हुए सचिव ने असंतोष व्यक्त करते हुए कहा कि प्रमाणीकरण की गति अपेक्षा के अनुरूप नहीं है। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन ग्रामों में योजनाएं भौतिक रूप से पूर्ण हो चुकी हैं, वहां पंचायतों के माध्यम से प्रमाणीकरण की प्रक्रिया तत्काल पूरी की जाए। सचिव ने कहा कि प्रमाणीकरण केवल औपचारिकता नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करने का माध्यम है कि प्रत्येक परिवार को वास्तव में नल से जल मिल रहा है। उन्होंने प्रमाणीकरण में पंचायतों की भूमिका को निर्णायक बताते हुए जनपद एवं जिला सीईओ को विशेष निगरानी के निर्देश दिए।

वहीं घरेलू नल कनेक्शन की समीक्षा के दौरान सचिव ने स्पष्ट किया कि नल कनेक्शन देने के बाद यदि जल आपूर्ति नहीं हो रही है तो ऐसी योजना असफल मानी जाएगी। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी नल कनेक्शनों को प्राथमिकता के आधार पर फंक्शनल किया जाए और जहां तकनीकी या स्रोत संबंधी समस्या है, वहां वैकल्पिक समाधान तत्काल तैयार किए जाएं। उन्होंने यह भी कहा कि नल कनेक्शन की संख्या और वास्तविक जल आपूर्ति में किसी भी प्रकार का अंतर स्वीकार्य नहीं होगा।

जल स्रोतों एवं ओवरहेड टैंक निर्माण की समीक्षा करते हुए सचिव ने कहा कि स्रोतविहीन और आंशिक स्रोत वाले ग्रामों पर विशेष फोकस किया जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि ऐसे ग्रामों में नए नलकूप, वैकल्पिक जल स्रोत एवं सोलर आधारित समाधान तेजी से विकसित किए जाएं। ओवरहेड टैंकों के अधूरे कार्यों को शीघ्र पूरा करने तथा जिन टैंकों का निर्माण पूर्ण हो चुका है, उन्हें तत्काल जल आपूर्ति से जोड़ने के निर्देश भी दिए गए। समूह जल प्रदाय योजनाओं पर चर्चा करते हुए सचिव ने स्पष्ट कहा कि इन योजनाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही से हजारों ग्रामीण प्रभावित होते हैं। उन्होंने निर्देश दिए कि चैनपुर, खरलाधार, लाई, उधानापुर सहित सभी समूह जल प्रदाय योजनाओं में ट्रायल रन अनिवार्य रूप से किया जाए और संतोषजनक परिणाम मिलने के बाद ही योजनाओं को चालू घोषित किया जाए। उन्होंने ईएंडएम कार्य, पाइपलाइन, पंप एवं जल शुद्धिकरण संयंत्र के कार्यों की गुणवत्ता पर विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए।

सोलर पंप स्थापना की समीक्षा के दौरान सचिव ने कहा कि सोलर पंप जल जीवन मिशन की रीढ़ हैं, विशेषकर दूरस्थ और बिजली विहीन क्षेत्रों में। उन्होंने निर्देश दिए कि जहां साइट क्लियरेंस या फंड संबंधी समस्या है, वहां संबंधित विभाग आपसी समन्वय से तत्काल समाधान निकालें। क्रेडा को निर्देशित किया गया कि स्थापित सोलर सिस्टम की नियमित मेंटेनेंस व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए।

बैठक में सचिव ने यह भी स्पष्ट किया कि टंकियों का निर्माण और तकनीकी कार्य पीएचई विभाग की जिम्मेदारी है, जबकि जल आपूर्ति का संचालन, नल कनेक्शन, जल कर एवं उपयोग शुल्क की वसूली पंचायतों और नगरीय निकायों की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि यदि विभाग आपस में समन्वय नहीं रखेंगे तो योजनाएं धरातल पर सफल नहीं होंगी। सभी जिला एवं जनपद सीईओ को निर्देश दिए गए कि वे पीएचई के साथ नियमित समीक्षा बैठक कर योजनाओं की प्रगति सुनिश्चित करें।

वहीं चिरमिरी नगर निगम क्षेत्र में पेयजल व्यवस्था की समीक्षा करते हुए सचिव ने अवैध नल कनेक्शनों पर सख्त रुख अपनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अवैध कनेक्शन न केवल राजस्व को नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि वैध उपभोक्ताओं को मिलने वाली जल आपूर्ति भी प्रभावित करते हैं। उन्होंने लाइन काटने, विधिसम्मत कार्रवाई करने और जल कर वसूली बढ़ाने के स्पष्ट निर्देश दिए। शिकायत निवारण प्रणाली की समीक्षा में सचिव ने कहा कि जल आपूर्ति से जुड़ी शिकायतें आम जनता की बुनियादी समस्या से जुड़ी होती हैं, इसलिए उनका समयबद्ध निराकरण सर्वाेच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने निर्देश दिए कि शिकायतों की नियमित समीक्षा कर लंबित प्रकरणों को शीघ्र हल किया जाए। बैठक के अंत में सचिव मोहम्मद कैसर अब्दुलहक ने कहा कि जल जीवन मिशन केवल एक योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण जीवन में स्वास्थ्य, स्वच्छता और सम्मान से जुड़ा हुआ अभियान है। उन्होंने सभी अधिकारियों से अपेक्षा जताई कि वे इसे लक्ष्य नहीं, बल्कि जिम्मेदारी मानकर कार्य करें और यह सुनिश्चित करें कि मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले का कोई भी गांव और कोई भी परिवार सुरक्षित एवं नियमित पेयजल से वंचित न रहे।

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