एमसीबी, छत्तीसगढ़। खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 इस बार किसानों के लिए उम्मीद, विश्वास और बेहतर व्यवस्था का नया अध्याय लेकर आया है। ग्राम मेन्ड्रा के किसान सूर्यप्रताप सिंह का सकारात्मक अनुभव इसका प्रमाण है, जिन्होंने कोड़ा उपार्जन केंद्र में धान बेचने के दौरान पूरी प्रक्रिया को सहज, पारदर्शी और किसान-सम्मान की भावना से भरपूर पाया।
सूर्यप्रताप सिंह बताते हैं कि उपार्जन केंद्र पहुंचते ही उन्हें वातावरण पिछले वर्षों से बिल्कुल अलग महसूस हुआ। केंद्र परिसर साफ-सुथरा था, किसानों के लिए सुव्यवस्थित कतारें, पर्याप्त बारदाना, पेयजल, बैठने की व्यवस्था और कर्मचारियों की तत्परता ने उन्हें प्रभावित किया। वे कहते हैं कि जहां पहले खरीदी के दौरान अव्यवस्था, भीड़ और समय की बर्बादी जैसी दिक्कतें होती थीं, वहीं इस बार संपूर्ण प्रक्रिया सुगम, समयबद्ध और पारदर्शी रही।
विशेष रूप से उल्लेखनीय यह रहा कि उनका टोकन ऑनलाइन नहीं कटा था, फिर भी केंद्र में मौजूद अधिकारियों ने बिना किसी परेशानी के उनकी खरीदी की प्रक्रिया पूर्ण कराई। किसानों के प्रति यह संवेदनशीलता व्यवस्था में आए सकारात्मक बदलाव को स्पष्ट रूप से दर्शाती है। उन्होंने राज्य सरकार द्वारा घोषित 3100 प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य और प्रति एकड़ 21 क्विंटल खरीदी सीमा को किसान हित में बड़ा कदम बताया। उनके अनुसार यह निर्णय किसानों को आर्थिक सुरक्षा और उनके परिश्रम का सही मूल्य प्रदान करता है।
केंद्र की व्यवस्था से प्रभावित सूर्य प्रताप सिंह ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस वर्ष की खरीदी व्यवस्था ने साबित कर दिया है कि सरकार वास्तव में किसान-केंद्रित फैसले ले रही है। उनका अनुभव अब क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बन रहा है। कोड़ा उपार्जन केंद्र की पारदर्शी व्यवस्था इस बात का उदाहरण है कि संवेदनशील नीतियाँ जब जमीनी स्तर पर प्रभावी रूप से लागू होती हैं, तो कृषि केवल आजीविका नहीं बल्कि सम्मान और प्रगति का माध्यम बन जाती है।

