नई दिल्ली/ राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA), जिसे विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम 1987 के तहत गठित किया गया था, देश के उन नागरिकों के लिए आशा का स्तंभ बना हुआ है जो आर्थिक या सामाजिक कारणों से न्याय से वंचित रह जाते हैं। अधिनियम की धारा 12 के अंतर्गत पात्र कमजोर वर्गों को मुफ्त और सक्षम कानूनी सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से NALSA और उससे संबद्ध संस्थाएं सतत कार्य कर रही हैं, ताकि हर नागरिक के लिए न्याय तक पहुँच सुनिश्चित हो सके। इसी कड़ी में विवादों के सौहार्दपूर्ण समाधान हेतु लोक अदालतों का आयोजन भी न्यायिक तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
न्याय तक समयबद्ध और प्रभावी पहुँच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, अमरोहा, उत्तर प्रदेश के पर्यवेक्षण में कुल 16 विधिक सहायता केंद्र स्थापित किए गए हैं। इन केंद्रों के माध्यम से पैनल अधिवक्ताओं और विधिक सहायता बचाव पक्ष के परामर्शदाताओं ने वर्ष 2025-26 में, सितंबर 2025 तक, कुल 458 जरूरतमंद नागरिकों को निःशुल्क कानूनी सहायता प्रदान की। यह उपलब्धि न केवल जनसहभागिता को दर्शाती है, बल्कि न्याय प्रणाली के प्रति नागरिकों के बढ़ते विश्वास का प्रतीक भी है।
लोकसभा में यह महत्वपूर्ण जानकारी देते हुए विधि एवं न्याय मंत्रालय में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा संसदीय कार्य मंत्रालय में राज्य मंत्री श्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि देश का कोई भी नागरिक आर्थिक या अन्य अक्षमताओं के कारण न्याय से वंचित न रह जाए। उनका कहना था कि न्याय तक आसान पहुँच और कानूनी जागरूकता बढ़ाना सरकार की प्राथमिकता है, जिसके लिए विधिक सेवा संस्थान निरंतर सक्रिय हैं।
अमरोहा जिले में स्थापित विधिक सहायता केंद्रों के माध्यम से हुए ये प्रयास इस बात का प्रमाण हैं कि न्याय केवल अदालतों तक सीमित नहीं, बल्कि हर नागरिक के अधिकारों और सम्मान से सीधे जुड़ा हुआ है। सरकार और विधिक सेवा प्राधिकरण की यह संयुक्त पहल न्याय को घर-घर तक पहुँचाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रही है।

