एमसीबी, छत्तीसगढ़। खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में जिले की धान खरीदी व्यवस्था इस बार किसानों के लिए उम्मीद, भरोसा और सम्मान का नया अध्याय लिख रही है। सभी उपार्जन केंद्रों पर बढ़ती किसानों की भागीदारी साफ संकेत देती है कि सरकार और प्रशासन की तैयारियों ने इस वर्ष खरीदी व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, व्यवस्थित और किसान हितैषी बनाया है।
किसानों का भरोसा बढ़ा-इंद्रजीत सिंह की कहानी बनी उदाहरण
जनकपुर उपार्जन केंद्र में बरहोरी के किसान इंद्रजीत सिंह ने अपने 80 क्विंटल धान की बिक्री कर खरीदी प्रक्रिया का प्रत्यक्ष अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि इस बार केंद्र पर पहले से कहीं बेहतर सुविधाएँ उपलब्ध हैं-पर्याप्त बरदाना साफ-सुथरी व्यवस्था पीने के पानी की सुविधा धान मापने और तौल की मशीनें पूर्ण रूप से दुरुस्त स्टाफ का सहयोग और तत्पर रवैया इन व्यवस्थाओं ने धान बेचने आए किसानों को पूरा भरोसा दिया कि उनकी मेहनत का पूरा सम्मान किया जा रहा है।
डिजिटल व्यवस्था से पारदर्शिता और रफ्तार
इंद्रजीत सिंह ने विशेष रूप से डिजिटल टोकन, तौल और भुगतान प्रक्रिया की प्रशंसा की। उन्होंने कहा- “इस बार न कोई अव्यवस्था है, न कोई अनावश्यक प्रतीक्षा। सब कुछ समय पर, सटीक और पारदर्शी तरीके से हो रहा है।” इस तेज और सहज प्रक्रिया ने साबित किया कि जिले में खरीदी व्यवस्था किसानों के अनुकूल बन चुकी है।
समर्थन मूल्य से मजबूत हुई ग्रामीण अर्थव्यवस्था
राज्य सरकार द्वारा प्रति एकड़ 21 क्विंटल स्वीकृति सीमा और 3100 रुपए प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य का निर्णय किसानों के लिए आर्थिक सशक्तिकरण का नया आधार बना है। इंद्रजीत बताते हैं कि पिछले वर्ष खरीदी से हुई आय का उपयोग उन्होंने खेत सुधारी कृषि उपकरण ख़रीदा बच्चों की शिक्षा जैसे क्षेत्रों में किया। इस वर्ष भी उन्हें उम्मीद है कि बेहतर समर्थन मूल्य से उनका परिवार और कृषि दोनों मजबूत होंगे।
प्रशासनिक सतर्कता से और प्रभावी हुई व्यवस्था
धान खरीदी को सुचारू रखने के लिए प्रशासन, खाद्य विभाग और मार्कफेड लगातार निगरानी कर रहे हैं। डिजिटल पंजीयनॉ दुरुस्त तौल प्रणाली समयबद्ध भुगतान गोदाम और भंडारण की तैयारी इन सभी प्रबंधों ने खरीदी केंद्रों की विश्वसनीयता बढ़ाई है।
जिले के लिए यह खरीदी-सफलता और विश्वास का वर्ष
किसानों के सकारात्मक अनुभव और बढ़ती उपस्थिति स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि यह वर्ष कृषि आधारित परिवारों की खुशहाली, सम्मान और समृद्धि का वर्ष बन रहा है। धान खरीदी व्यवस्था ने न केवल किसानों का विश्वास लौटाया है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई ताकत दी है।

