एमसीबी, छत्तीसगढ़। वन मंडल के रिहायशी इलाकों में उत्पाती भालुओं के आतंक के कारण पैदा हुई गंभीर स्थिति पर उच्च स्तरीय प्रशासनिक कार्रवाई शुरू हो गई है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के निर्देश पर, वन विभाग ने मादा भालू और उसके दो शावकों को सुरक्षित पकड़ने के लिए ‘ऑपरेशन ट्रैंक्विलाइज’ का प्रस्ताव तैयार किया है । वनमंडल अधिकारी डीएफओ मनीष कश्यप ने प्रधान मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ) को आपात पत्र भेजकर भालुओं को ट्रैंक्विलाइज करने की अनुमति मांगी। पत्र में उन्होंने बताया कि भालू रिहायशी इलाकों में भोजन की तलाश में लोगों के घरों और कालोनियों तक घुसकर विचरण कर रहे हैं। पत्र में डीएफओ ने उल्लेख किया कि मादा भालू और उसके शावक प्रतिदिन सुबह तीन बजे तक घरों के आसपास घूमते हैं, जिससे ग्रामीण भयभीत और जागते रहते हैं। इससे मानव जीवन और संपत्ति को गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है।
अनुमति का उद्देश्य और अगला चरण
पीसीसीएफ की मंजूरी मिलते ही ट्रैंक्विलाइजर टीम भालुओं को सुरक्षित पकड़कर घने जंगल में छोड़ेगी। इस कदम से मानव-वन्यजीव संघर्ष समाप्त होने की उम्मीद है। मनेंद्रगढ़ के ग्रामीण डीएफओ की तत्परता से राहत की उम्मीद कर रहे हैं और उन्हें विश्वास है कि यह कार्रवाई जल्द ही उन्हें इस आतंक से मुक्ति दिलाएगी।

