एमसीबी, छत्तीसगढ़। शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बुंदेली में बाल अधिकार सप्ताह का उत्सव आज एक अलग ऊर्जा और नई सोच के साथ संपन्न हुआ, यह कार्यक्रम जिला दंडाधिकारी एवं कलेक्टर डी. राहुल वेंकट के निर्देशन और महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी आर.के. खाती के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम ने बाल अधिकारों को समझने और उन्हें जीवन में लागू करने का सशक्त संदेश दिया। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना की थीम पर आयोजित इस विशेष सप्ताह में छात्राओं ने अपनी सोच और संवेदना को नाट्य प्रस्तुति, चित्रकला, पोस्टर, लेखन और कहानी के माध्यम से जिस प्रभावशाली ढंग से व्यक्त किया उसने पूरे कार्यक्रम को एक जीवंत अनुभव में बदल दिया। NSS और NCC की संयुक्त नाट्य प्रस्तुति ने बाल अधिकार, सुरक्षा, भेदभाव और सामाजिक चुनौतियों की तस्वीर को समाज के सामने सशक्त रूप में रखा, जबकि खुशहाल बचपन सुरक्षित बचपन विषय पर बनी चित्रकला और पोस्टरों ने बालिकाओं की कलात्मक क्षमता को नई ऊंचाइयाँ दीं।
यदि मैं पिता या माता होती विषय पर बालिकाओं द्वारा लिखी गई रचनाओं में भावनाओं, जिम्मेदारी और समझ की गहरी झलक दिखाई दी, वहीं मेरे सपनों का भविष्य पर लिखी गई कहानियों में आत्मनिर्भरता, शिक्षा, समान अवसर और उज्ज्वल भारत की स्पष्ट झलक उभरकर सामने आई। बालिकाओं की प्रस्तुतियों में यह भाव प्रमुख रूप से परिलक्षित हुआ कि हर बच्ची राष्ट्र की अमूल्य पूंजी है और उसके सपने न केवल उसका भविष्य संवारते हैं बल्कि समाज को भी नई दिशा देते हैं। कार्यक्रम को सुव्यवस्थित रूप देने में जिला मिशन समन्वयक श्रीमती तारा कुशवाहा की महत्वपूर्ण भूमिका रही। मिशन शक्ति विभाग की वित्तीय साक्षरता विशेषज्ञ श्रीमती अनीता कुमारी शाह, सखी वन स्टॉप सेंटर की काउंसलर सुश्री अमीषा कुशवाहा और विधिक सेवा प्राधिकरण की श्रीमती अंजनी यादव की उपस्थिति ने बालिकाओं को प्रेरणा और मार्गदर्शन प्रदान किया। निर्णायक मंडल ने सर्वश्रेष्ठ कहानियों का चयन किया और हर प्रतिभागी को सम्मान और प्रोत्साहन स्वरूप पुरस्कार प्रदान किए गए। विद्यालय प्राचार्य श्री अंगद प्रसाद केवंट और शिक्षक शिक्षिकाओं ने छात्राओं की प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम बालिकाओं को नेतृत्व, आत्मविश्वास और सकारात्मक सामाजिक सोच की दिशा में आगे बढ़ाने वाले महत्वपूर्ण मंच हैं। कार्यक्रम का समापन सभी बालिकाओं को नाश्ता वितरण के साथ हुआ और पूरे विद्यालय में बाल अधिकारों के प्रति जागरूकता और बालिकाओं की प्रतिभा का उत्सव एक यादगार दिवस के रूप में अंकित हो गया।

