Wednesday, March 4, 2026
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खरीफ की समीक्षा एवं रबी कार्ययोजना का निर्धारण: कलेक्टर ने दिए विभागीय अधिकारियों को आवश्यक निर्देश

एमसीबी, छत्तीसगढ़। कृषि उत्पादन आयुक्त श्रीमती शहला निगार के निर्देशानुसार खरीफ फसलों की समीक्षा एवं रबी कार्ययोजना निर्धारण हेतु कृषि, उद्यानिकी, मत्स्य एवं पशुपालन विभागों की संयुक्त समीक्षा बैठक संभाग स्तर पर जिला सूरजपुर में आयोजित की गई। इसके अनुपालन में कलेक्टर द्वारा जिला स्तर पर समीक्षा बैठक आयोजित की गई।कलेक्टर ने कृषि विभाग को निर्देशित किया कि कृषकों को ग्रीष्म काल में धान के स्थान पर दलहन एवं तिलहन फसलों की खेती हेतु प्रेरित किया जाए, जिससे धान का रकबा घटाया जा सके।

रबी सीजन में चना, मसूर, उड़द, सरसों, अलसी सहित उद्यानिकी फसलों के क्षेत्र का विस्तार करने पर जोर दिया गया।भूमि में संचित नमी का उपयोग कर पारंपरिक पद्धति से फसलों की बुवाई हेतु कृषकों को प्रोत्साहित किया जाएगा। रबी फसल हेतु 3 करोड़ का ऋण वितरण लक्ष्य निर्धारित। 9250 हेक्टेयर क्षेत्र में रबी फसलों की बुवाई का लक्ष्य तय। गेहूं, चना, मूंग, उड़द एवं अलसी हेतु 3452 क्विंटल बीज की मांग सहकारी समितियों में भंडारण हेतु की गई है। आगामी वर्ष 2026-27 हेतु बीज उत्पादन कार्यक्रम का लक्ष्य तय किया गया है ताकि जिला प्रमाणित बीज में आत्मनिर्भर बन सके। पात्र वनाधिकार पट्टाधारी एवं विशेष पिछड़ी जनजाति कृषकों का 100% पंजीयन, ई-केवाईसी, भूमि एवं आधार सीडिंग तत्काल पूर्ण करने तथा संदिग्ध प्रकरणों का शीघ्र सत्यापन करने के निर्देश दिए गए ।

देश में तिलहन उत्पादन की कमी को देखते हुए जिले में ऑयल पाम खेती के लिए 300 हेक्टेयर का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। केवल उन्हीं कृषकों का चयन किया जाएगा जिनके पास सिंचाई सुविधा उपलब्ध है। मत्स्य विभाग को कंसी निर्माण बढ़ाने एवं धान सह मत्स्य पालन को प्रोत्साहित करने के निर्देश। भरतपुर विकासखंड में सर्कुलर चायनीज़ हैचरी निर्माण हेतु प्राक्कलन तैयार कर संचालक मत्स्य पालन को भेजने के निर्देश दिए गए हैं । पशुधन विभाग को पशु उपचार, टीकाकरण, बंध्याकरण तथा कृत्रिम गर्भाधान कार्यों की शत-प्रतिशत पूर्ति के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही विभागीय व्यक्ति-मूलक योजनाओं के लक्ष्य अनुसार कार्य पूर्ण करने के लिए कहा गया। बैठक का उद्देश्य कृषि, उद्यानिकी, मत्स्य एवं पशुधन क्षेत्रों में रबी फसल की तैयारी, आत्मनिर्भरता, और कृषकों की आय वृद्धि हेतु ठोस कार्ययोजना बनाना है।

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