Sunday, March 8, 2026
Homeराजनीतिदेश में वायु प्रदूषण पर बढ़ा सियासी बवाल: विपक्ष ने बताया राष्ट्रीय...

देश में वायु प्रदूषण पर बढ़ा सियासी बवाल: विपक्ष ने बताया राष्ट्रीय आपदा, कांग्रेस बोली, PM2.5 कण मस्तिष्क और शरीर पर कर रहे “घातक हमला”

नई दिल्ली!  देश में बढ़ते वायु प्रदूषण को लेकर विपक्ष ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। राजधानी दिल्ली समेत उत्तर भारत के कई राज्यों में हवा की गुणवत्ता लगातार “गंभीर” श्रेणी में पहुंचने के बाद कांग्रेस ने इसे “ब्रेन और बॉडी पर हमला” बताते हुए केंद्र से तात्कालिक कदम उठाने की मांग की है। पार्टी प्रवक्ताओं ने कहा कि पीएम2.5 और पीएम10 जैसे सूक्ष्म कण सिर्फ सांस की बीमारियां ही नहीं बढ़ा रहे, बल्कि मानव मस्तिष्क, हृदय और तंत्रिका तंत्र को स्थायी क्षति पहुँचा रहे हैं।

कांग्रेस ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि भारत में वर्ष 2024 में वायु प्रदूषण से जुड़ी लगभग 20 लाख मौतें दर्ज की गईं, जिनमें अधिकांश मामले शहरी और औद्योगिक क्षेत्रों से आए हैं। पार्टी ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की “नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम” (NCAP) कागज़ों तक सीमित है और ज़मीनी स्तर पर प्रदूषण नियंत्रण के लिए कोई ठोस व्यवस्था नहीं दिख रही। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि यह सिर्फ पर्यावरण का नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और जीवन के अधिकार का भी संकट है । दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, पटना, लखनऊ, कोलकाता और भोपाल जैसे शहरों में एक्यूआई 400 के पार पहुँच गया है, जिससे स्कूल बंद करने और निर्माण कार्यों पर रोक लगाने जैसे आपात कदम उठाने पड़े हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक इस तरह की हवा में रहने से बच्चों में फेफड़ों का विकास रुक सकता है और बुजुर्गों में दिल के दौरे का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। कांग्रेस ने केंद्र सरकार से प्रदूषण को “राष्ट्रीय आपदा” घोषित करने, फसल अवशेष प्रबंधन, वाहन उत्सर्जन नियंत्रण, हरित ऊर्जा के प्रयोग को अनिवार्य करने और शहरों में हरित क्षेत्र बढ़ाने जैसी ठोस नीतियाँ अपनाने की मांग की है। पार्टी ने कहा कि यदि सरकार ने तत्काल कार्रवाई नहीं की, तो आने वाले वर्षों में भारत “गैस चैंबर” जैसी स्थिति में पहुँच सकता है।

इस बीच केंद्र सरकार ने विपक्ष के आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताते हुए कहा है कि प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए राज्यों के साथ मिलकर समन्वित रणनीति पर काम चल रहा है। पर्यावरण मंत्रालय के अनुसार, 131 शहरों में “नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम” के तहत प्रदूषण स्तर में 2017 की तुलना में औसतन 25% की कमी दर्ज की गई है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यह कमी अभी भी जनस्वास्थ्य की दृष्टि से अपर्याप्त है। देश के प्रमुख स्वास्थ्य संस्थानों ने चेतावनी दी है कि यदि वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए कठोर कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले दशक में श्वसन रोग, हृदय रोग, स्ट्रोक और कैंसर जैसी बीमारियों का बोझ कई गुना बढ़ सकता है।

RELATED ARTICLES

विज्ञापन

- Advertisment -

देश

Recent Comments